चंडीगढ़। प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों ने सरकार से मांग की है कि अगर राज्य सरकार स्कूलों द्वारा निर्धारित फीस देने को तैयार हो जाए तो वे आरटीई (निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार) के तहत 25 फीसदी की बजाय सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए तैयार हैं। हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि आधा सत्र बीत जाने के बाद भी आरटीई के तहत दाखिला देने वाले स्कूलों की प्रतिपूर्ति राशि जारी नहीं की गई है जिससे स्कूलों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब बच्चों के दाखिले को प्रोत्साहित करने के बजाय सीटें न दिखाने पर स्कूलों पर जुर्माना लगा रही है। कुंडू ने कहा कि राज्य के 1680 मान्यता प्राप्त स्कूलों और 1128 अस्थायी स्कूलों की सूची निदेशालय को भेजी जा रही है। फीस के अनुसार इन स्कूलों पर 5,000 से लेकर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि 23 अक्तूबर तक सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों की सूची निदेशालय में भेजनी होगी ताकि महानिदेशक मौलिक शिक्षा व्यक्तिगत रूप से सुनवाई कर सकें।