590 करोड़ रुपये के घोटाले में हरियाणा सरकार ने हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीएसएल) के पूर्व वित्त निदेशक अमित दीवान को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
दीवान पर आरोप है कि उसने घोटाले के मुख्य साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर आईडीएफसी फर्स्ट व एयू स्माल फाइनेंस बैंक में नियमों को दरकिनार कर खाते खुलवाए। इसके एवज में 50 लाख रुपये की रिश्वत ली। उसने वित्त विभाग के निर्देशों का उल्लंघन कर आईडीएफसी में एचपीजीएसएल ड्राई फ्लाई ऐश फंड के नाम से खाता खोलने का प्रस्ताव भी आगे बढ़ाया। इसके लिए अन्य बैंकों से कोटेशन भी नहीं लिए।
घोटाले के समय वह एचपीजीसीएल में प्रतिनियुक्ति पर था। निलंबन के बाद उसे उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम में मुख्य वित्तीय अधिकारी के पद पर वापस भेज दिया गया। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने दीवान को इसी साल 18 मार्च को गिरफ्तार किया था। वह अभी पुलिस हिरासत में हैं।
बर्खास्तगी के आदेश के अनुसार एचपीजीसीएल ने 27 फरवरी, 2024 को ड्राई फ्लाई ऐश फंड के नाम से आईडीएफसी की चंडीगढ़ की सेक्टर 32 की शाखा में खाता खोला। 11 नवंबर 2024 को इस खाते में 50 करोड़ रुपये जमा कराए गए। आरोप है कि दीवान ने ही अन्य सूचीबद्ध बैंकों से कोटेशन आमंत्रित किए बिना यह खाता खोलने का प्रस्ताव दिया था। खाता खोलते समय आईडीएफसी फर्स्ट बैंक हरियाणा सरकार के साथ सूचीबद्ध नहीं था। इसे 12 जुलाई 2024 को सूचीबद्ध किया गया।
फर्जी रसीद बनाकर बचत खाते को एफडी में बदल दिया
27 फरवरी 2024 को खोला गया खाता पहले बचत खाता था। 28 मार्च 2025 के विभाग के पत्र के मुताबिक इसे बाद में एफडी में बदल दिया गया। इसके लिए एफडी की जो रसीद दी गई, वह नकली निकली और खाते के रिकॉर्ड में भी एफडी बनने की कोई एंट्री दर्ज नहीं थी। इस खाते से 20 मार्च 2025 से धोखाधड़ी वाले लेनदेन शुरू हुए। 9 मार्च 2026 तक ब्याज प्रविष्टियों सहित कुल 32 लेनदेन हुए जिनमें से आठ ऊर्जा विभाग की अनुमति के बिना धोखाधड़ी से किए गए। इसके अलावा, 2 जून 2025 को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट के नाम से एक और खाता खोला गया, जिसे भी दीवान की मंजूरी से खोला गया था।
मुख्य आरोपी रिभव व बिचाैलियों से लेता रहा रिश्वत
राज्य सतर्कता विभाग के अनुसार, मुख्य आरोपी रिभव ऋषि और अभय कुमार (दोनों पूर्व बैंक अधिकारी) ने पूछताछ में बताया कि सरकारी पैसे की गड़बड़ी करने के लिए साजिश के तहत खाते खोले गए थे। अमित दीवान ने कभी सीधे मुख्य आरोपी रिभव ऋषि और और कुछ मामलों में बिचौलियों के माध्यम से रकम प्राप्त की। खास तौर पर 6 जनवरी 2026 को उसे 50 लाख रुपये की रिश्वत दी गई थी। कॉल रिकॉर्ड से भी पता चला कि घटना के दौरान उनका मुख्य आरोपी से लगातार संपर्क था।
बिना विभागीय जांच के बर्खास्तगी क्यों
सरकार ने दीवान को बिना विभागीय जांच के ही बर्खास्त कर दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चूंकि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है, इसलिए समानांतर विभागीय जांच से सबूत प्रभावित हो सकते थे और आरोपी को अपने पक्ष में साक्ष्यों से छेड़छाड़ का मौका मिल सकता था।
तीन अधिकारी पहले ही हो चुके बर्खास्त
-30 अप्रैल को हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के वित्त नियंत्रक राजेश सांगवान को 10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में बर्खास्त किया गया
-23 अप्रैल को नरेश कुमार को 6.55 करोड़ रुपये और लग्जरी कार लेने के आरोप में हटाया गया।
-24 अप्रैल को शिक्षा विभाग के अधिकारी रणधीर सिंह को 54 करोड़ रुपये के घोटाले में बर्खास्त किया गया।