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आईडीएफसी बैंक धोखाधड़ी: बैंक अधिकारियों पर एफआईआर, सीएम बोले-पैसा सुरक्षित; गठित होगी उच्चस्तरीय कमेटी

Tue, 24 Feb 2026 12:25 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस के अन्य विधायकों ने 590 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला उठाया। हुड्डा ने कहा, राज्य सरकार को जवाब देना चाहिए।
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हरियाणा विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 590 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले ने तूल पकड़ लिया है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर विधानसभा में सरकार को घेरा। सरकार की ओर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मोर्चा संभाला और बताया, बैंक से पहले राज्य सरकार ने 18 फरवरी को गड़बड़ी पकड़ ली थी।
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राज्य सरकार के बताने के बाद बैंक ने कार्रवाई की है। सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक एवं सतर्कता ब्यूरो (एसीबी) को इस मामले में तह तक जाने के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा, जो जांच करेगी यह चूक किसकी थी। पूरे मामले में यदि हरियाणा सरकार का कोई अधिकारी दोषी पाया गया तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। दोपहर बाद एसीबी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक व एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इस मामले में किसी सरकारी कर्मचारी के भी शामिल होने का शक है।

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस के अन्य विधायकों ने 590 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला उठाया। हुड्डा ने कहा, राज्य सरकार को जवाब देना चाहिए। बैंक ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए दोषी बैंक अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया जबकि राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। सरकार दोषियों की पहचान भी नहीं कर पाई।
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इस पर सीएम ने कहा कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में विभिन्न सरकारी विभागों के खाते थे जिनका नियमित मिलान करने के दौरान जनवरी में कुछ विसंगतियां सामने आई थीं। सरकार ने 18 फरवरी को ही बैंक को पैनल से हटा दिया था। साथ ही सभी विभागों को इस बैंक से ब्याज सहित पूरा पैसा राष्ट्रीय बैंक में ट्रांसफर करने के लिए कह दिया था। एहतियातन राज्य सरकार ने बैंक से पूरी राशि वापस लेने और इसे किसी अन्य वित्तीय संस्थान में स्थानांतरित करने का फैसला किया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार का पूरा पैसा सुरक्षित है। जहां भी पैसा स्थानांतरित किया गया है, उसे ब्याज समेत वसूला जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बैंक दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

इस बीच कांग्रेस के कुछ विधायकों ने नारेबाजी करने की कोशिश की। इस पर सैनी ने कहा कि यह गंभीर मामला है। इसके लिए हरियाणा सरकार गंभीर है। उल्लेखनीय है कि यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को अपने खाते बंद कर धन को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। इस दाैरान बैंक में जमा राशि में 590 करोड़ कम मिले।

बैंक में 450 करोड़ एफडी के रूप में थे, बाकी पैसे अकाउंट में थे

सीएम ने सदन को बताया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सावधि जमा (एफडी) समेत कई बैंक खातों में जमा धनराशि से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का पता चला है। अब तक सात विभागों का पैसा बैंक में जमा होने की बात सामने आ चुकी है। लगभग 450 करोड़ रुपये एफडी में थे, जबकि बाकी पैसे बैंक के अकाउंट में जमा कराए गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंकों में विभागों द्वारा पैसा रखने की प्रथा आज से नहीं, बल्कि पहले से ही है। कांग्रेस के समय में भी विभागों का पैसा बैंकों में रहता था। बैंकों के पैनल बनते हैं और नए बैंक जुड़ते रहते हैं।

इन धाराओं में एफआईआर दर्ज

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316 (5) : जब किसी व्यक्ति को संपत्ति सौंपते समय उस पर विश्वास जताया जाता है और वह व्यक्ति उस संपत्ति का गलत तरीके से उपयोग करता है। अपने निजी फायदे के लिए उसका दुरुपयोग करता है या उस विश्वास का उल्लंघन करता है तो इसे आपराधिक विश्वासघात माना जाता है।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318 (4) : किसी व्यक्ति को झूठी जानकारी देकर या तथ्य छिपाकर उसे गुमराह करना। जानबूझकर धोखे से संपत्ति को हानि पहुंचानी
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 336 (3) : जालसाजी कर दूसरे को धोखा देना व नुकसान पहुंचाना।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 338 : बॉन्ड, शेयर, प्रॉमिसरी नोट्स या अन्य वित्तीय दस्तावेज जिनकी आर्थिक या कानूनी महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 340 (2) : यदि कोई व्यक्ति किसी जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को यह जानते हुए कि वह जाली है, असली के रूप में उपयोग करता है।
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भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61 (2) : आपराधिक षड्यंत्र में भागीदार।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (2) : सरकारी कर्मचारी के आपराधिक कदाचार करने पर।
 
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