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सतत विकास जरूरी, हम हमेशा जंगलों में तो नहीं रह सकते: हाईकोर्ट

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-रहने के लिए निर्माण कार्य जरूरी लेकिन प्रकृति से संतुलन बनाकर
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-2788 वृक्ष काटने के मामले में संज्ञान पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। डीएलएफ गुरुग्राम हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए 2788 वृक्षों की कटाई मामले में लिए गए संज्ञान पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सतत विकास जरूरी है, हम हमेशा जंगलों में तो नहीं रह सकते। कोर्ट ने कहा कि रहने के लिए निर्माण जरूरी है लेकिन प्रकृति से संतुलन बनाने के बाद। इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
मामले की सुनवाई आरंभ होते ही वन विभाग ने बताया कि डीएलएफ ने जनवरी में वृक्षों की कटाई के लिए आवेदन किया था। डीएलएफ ने कहा कि वे पर्यावरण के लिए बेहद सजग हैं और अभी तक 1.4 लाख वृक्ष लगा चुके हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में काम के लिए उन्हें कई अवाॅर्ड मिल चुके हैं। कोर्ट को बताया गया कि भूमि पर अधिकांश वृक्ष कीकर के हैं और यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। केंद्र सरकार भी राज्य सरकारों को इनके स्थान पर अन्य वृक्ष लगाने को कह चुकी है।
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हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार से राजस्व मानचित्र पर यह स्पष्ट करने को कहा कि जिन खसरा नंबरों पर वृक्षों की कटाई की अनुमति दी गई है वे क्या हरियाणा के अरावली क्षेत्र या संरक्षित वन क्षेत्र में आते हैं। सरकार की ओर से दायर शपथपत्र और दस्तावेजों के आधार पर अदालत को बताया गया कि संबंधित भूमि अरावली, गैर-मुमकिन पहाड़ या संरक्षित वन क्षेत्र में नहीं आती। कोर्ट ने कहा कि वनों की रक्षा यथासंभव की जानी चाहिए लेकिन विकास भी जरूरी है। काेर्ट ने सभी पक्षों को बुधवार को बारी-बारी सुना और इसके बाद उन्हें अपने-अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की प्रति सौंपने का आदेश दिया। बुधवार को इस मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
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