-नाबालिग की जमानत पर विचार करने के मानक अलग
-जेजेबी को मामला भेजा वापस, जमानत पर दोबारा सुनवाई का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पानीपत के एक नाबालिग हत्यारोपी की जमानत अर्जी खारिज करने के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) और अपीलीय अदालत के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। मामले को पुनर्विचार के लिए जेजेबी को भेजते हुए कोर्ट ने कहा कि आदेश बिना ठोस आधार के पारित किया गया और यह न्यायसंगत नहीं है।
अक्टूबर 2023 को एक किशोर पर एक गांव के अनुसूचित जाति समुदाय के युवक की हत्या कर उसके शव को फेंकने का आरोप लगा था। इस मामले में एक वयस्क आरोपी भी शामिल है। आरोपी 16 वर्षीय नाबालिग की जमानत याचिका फरवरी 2024 में जेजेबी ने खारिज कर दी थी जिसे बाद में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने भी बरकरार रखा। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल करते हुए आदेश को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आरोप की प्रकृति गंभीर है, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि जमानत से इनकार करने की शर्तें पूरी हो गई हैं। चौंकाने वाली बात यह बताई गई कि नाबालिग के सामाजिक-आर्थिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच के लिए आवश्यक सामाजिक जांच रिपोर्ट (एसआईआर) तक जेजेबी ने नहीं मंगाई और आदेश में इस संबंध में कोई कारण भी दर्ज नहीं किया। हाईकोर्ट ने इसे नाबालिग के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए मामले को जेजेबी को वापस भेजा और निर्देश दिए कि सभी पहलुओं का ध्यान रखते हुए कानून निर्धारित मानकों के आधार पर नई सुनवाई कर आदेश पारित किया जाए। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि बच्चों से संबंधित मामलों में जमानत पर विचार करने के मानक बिल्कुल अलग होते हैं, लेकिन इस मामले में अदालतें अभियोजन पक्ष की दलीलों से प्रभावित हो गईं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किशोर न्याय अधिनियम (जे जे एक्ट) के अनुसार जमानत से इनकार तभी किया जा सकता है जब यह प्रतीत हो कि नाबालिग का आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों से संबंध है।