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HERC का सार्थक टैरिफ आर्डर: घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, 300 यूनिट तक नहीं लगेगा एमएमसी, किसानों को भी फायदा

Thu, 03 Apr 2025 09:18 AM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए सार्थक टैरिफ आर्डर निकाला है। इससे घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के साथ कृषि उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा।
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electricity - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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हरियाणा के लोगों को राहत देते हुए हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपना टैरिफ आर्डर जारी किया है, जो 1 अप्रैल से लागू भी हो गया है। आयोग के अध्यक्ष नन्द  लाल शर्मा और सदस्य मुकेश गर्ग के नेतृत्व में यह आर्डर पारित किया गया है।

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ऐसे में अब घरेलू श्रेणी के ऐसे उपभोक्ताओं, जिनकी मासिक बिजली खपत 300 यूनिट तक और लोड 5 किलोवाट तक है, उनके लिए मासिक न्यूनतम शुल्क (एमएमसी) को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब इन उपभोक्ताओं को केवल अपनी वास्तविक खपत के अनुसार ही भुगतान करना होगा। यह प्रावधान 15–20 पैसे प्रति यूनिट की मामूली दर वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करेगा और अनावश्यक खपत को रोकने में सहायक होगा।

टैरिफ आर्डर में कृषि उपभोक्ताओं को भी राहत प्रदान दी गई है। मीटर्ड कनेक्शन वाले कृषि उपभोक्ताओं के लिए एमएमसी को 200 रुपये से घटाकर 180/144 रुपये प्रति बीएचपी प्रति वर्ष किया गया है, जो लोड पर निर्भर करेगा। आयोग ने 4,520.24 करोड़ रुपये के प्रस्तावित राजस्व अंतर के अगेंस्ट केवल 3,262.38 करोड़ रुपये को स्वीकृत किया है। शेष अनुचित व्ययों को अस्वीकार कर दिया गया है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) को लागत नियंत्रण और हानि में कमी लाने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
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सतत कृषि को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आयोग ने एक नई टैरिफ श्रेणी निर्धारित की है, जिसमें मशरूम कंपोस्ट व स्पॉन उत्पादन, हाइड्रोपोनिक्स, एयरोपोनिक्स तथा किसान उत्पादक संगठनों द्वारा संचालित कोल्ड स्टोरेज इकाइयों को शामिल किया गया है। इस श्रेणी में 20 किलोवाट तक के लोड पर 4.75 रुपये प्रति यूनिट और उससे अधिक लोड पर 6.50 रुपये प्रति यूनिट की दर निर्धारित की गई है। आयोग ने वितरण हानि की अधिकतम सीमा 10% तय की है और वितरण कंपनियों द्वारा प्रस्तुत अत्यधिक अनुमानों को खारिज कर दिया है। साथ ही 6 माह के भीतर लागत-आधारित आपूर्ति अध्ययन (कोस्ट ऑफ सप्लाई स्टडी) कराना अनिवार्य किया गया है। 

हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने वितरण कंपनियों को पीएम सूर्य घर योजना को सरल बनाने, नेट मीटर की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 200 एमडब्ल्यूएच बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) की स्थापना के निर्देश दिए हैं।

इस आर्डर में वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। वित्त वर्ष 2023-24 में व्यापारिक बकाया 2,877 करोड़ रुपये की वृद्धि के साथ 6,370 करोड़ तक पहुंच गया है। इस पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने बकाया वसूली और भंडारण प्रणाली के पुनर्गठन के निर्देश दिए हैं। हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (एचवीपीएनएल) द्वारा 572.23 करोड़ रुपये की अनुपयोगी अधोसंरचना चिन्हित की गई है, जिसके लिए अधिक रणनीतिक और कुशल नियोजन की आवश्यकता बताई गई है। खराब मीटरिंग, ट्रांसफार्मर की क्षति, और लंबित कनेक्शन जैसी परिचालन संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने सभी शहरी फीडरों की एटी एंड सी हानियों को 20% से नीचे और ग्रामीण फीडरों की हानियों को 40% से नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पहले क्रमशः 25% और 50% पर थे। उपभोक्ताओं के लिए सरल और पारदर्शी बिलिंग प्रणाली लागू करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

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