प्रदेशभर के डिपो पर कर्मचारियों ने दो घंटे प्रदर्शन कर उठाई मांगें
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने निजीकरण के विरोध में शुक्रवार को प्रदेशभर के डिपो पर दो घंटे प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निजीकरण बंद नहीं किया तो उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यूनियन ने सरकार से 10,000 सरकारी बसें बेड़े में शामिल करने और 60,000 बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग की। कर्मचारियों ने निजी परमिट और निजी इलेक्ट्रिक बसों के फैसले रद्द करने की मांग उठाई।
यूनियन के महासचिव सुमेर सिवाच ने कहा कि अभी निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया गया है, जरूरत पड़ी तो निर्णायक आंदोलन होगा। परिवहन मंत्री ने 16 जून 2026 को 500 बसें खरीदने का आश्वासन दिया था लेकिन अब निजी परमिट दिए जा रहे हैं। राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद ने चेतावनी दी कि सरकार मानी हुई मांगों को लागू करने के बजाय निजीकरण को बढ़ावा दे रही है।
कर्मचारी नेताओं ने 362 रूटों पर 3648 निजी परमिट और निजी इलेक्ट्रिक बसें चलाने का निर्णय रद्द करने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि 10,000 सरकारी बसें रोडवेज के बेड़े में शामिल करने से 60,000 बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। यूनियन ने सरकार से सब्सिडी की राशि रोडवेज को देने की मांग की ताकि घाटा न हो। कर्मचारी नेताओं ने वेतनमान विसंगति दूर करने की मांग भी उठाई। उन्होंने चालकों का वेतनमान 54,100 रुपये और परिचालक व लिपिक का 35,400 रुपये करने की मांग रखी। बकाया बोनस का भुगतान, खाली पदों पर पदोन्नति और न्यायालय के निर्णय के अनुसार कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की भी मांग की गई। पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और विभाग में तुरंत नियमित कर्मियों की भर्ती करने पर जोर दिया गया।