1.70 लाख की नहीं हुई है नसबंदी, जिनकी हुई भी उन्हें वहीं छोड़ दिया गया जहां से पकड़ा था
13 जिलों में रुका हुआ था नसबंदी का काम, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से हरकत में आई सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लावारिस कुत्तों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार व्यवस्था करना हरियाणा के लिए चुनौती है। शीर्ष अदालत ने कुत्तों की नसबंदी करने, उसके बाद उन्हें वहीं न छोड़ने जहां से पकड़े गए थे, उनके लिए पर्याप्त शेल्टर होम बनाने के निर्देश दिए हैं। हरियाणा में 2.30 लाख लावारिस कुत्तों में अभी तक 60 हजार की ही नसबंदी हो सकी है। 1.70 लाख की होनी है। जिन कुत्तों की नसबंदी और टैगिंग हुई भी है, उन्हें वहीं छोड़ दिया गया। 13 जिलों में नसबंदी ठप पड़ी है और 11 जिलों में कुत्तों के लिए आश्रय केंद्र (शेल्टर होम) नहीं हैं। ऐसी स्थिति में हरियाणा के शहरों-कस्बों को लावारिस कुत्तों की समस्या से जल्द निजात दिलाना मुश्किल काम है, हालांकि सरकार अब हरकत में आई है।
स्थिति यह है कि सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और अस्पतालों के पास झुंड में घूमते कुत्ते लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। नारनौल, अंबाला, करनाल, भिवानी, चरखी दादरी, सिरसा, झज्जर, कैथल में कोई आश्रय स्थल नहीं है। रोजाना कुत्ते के काटने के सोनीपत में लगभग 100, रोहतक में 60, पानीपत में 30 और कैथल में 15 केस आ रहे हैं। सिरसा में पिछले छह माह में कुत्तों के काटने के 65 मामले सामने आए हैं। भिवानी में एक महीने में 4,300, चरखी दादरी में तीन माह में 2,895, हिसार में तीन माह में 3,000 डाॅग बाइट केस आए। बाकी जिलों में भी स्थिति चिंताजनक है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद राज्य सरकार की ओर से 31 अक्तूबर काे दिए हलफनामे में बताया गया हरियाणा के 87 शहरी निकायों में करीब 2 लाख 30 हजार 675 लावारिस कुत्ते हैं। इनमें से अभी तक 60 हजार 812 कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और टैगिंग हुई है। 2023 के एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों के तहत जिन कुत्तों की नसबंदी और टैगिंग की गई है, उन्हें वहीं छोड़ दिया गया जहां से उन्हें पकड़ा गया था जबकि अब कोर्ट ने निर्देश दिया है कि उन्हें वहीं नहीं छोड़ा जाना है, इसलिए सरकार को अब और मशक्कत करनी होगी। सरकार ने शीर्ष अदालत को यह भी जानकारी दी है कि राज्य के सभी नगर निकायों में नसबंदी का काम चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है जबकि हकीकत यह है कि अभी तक 13 जिलों में नसबंदी का काम रुका हुआ था। अब टेंडर जारी किए जा रहे हैं।
निकाय विभाग ने अब जिलों को निर्देश जारी किए हैं कि आक्रामक कुत्तों को सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा बल्कि उन्हें विशेष बाड़ों में रखा जाएगा। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और सोसाइटी प्रबंधन को अपने क्षेत्र में लावारिस कुत्तों के लिए आहार की जिम्मेदारी निभानी होगी। फीडिंग सेंटर भीड़-भाड़ वाले इलाकों, बच्चों के खेल स्थलों और मुख्य द्वारों से दूर बनाए जाएंगे ताकि किसी को असुविधा न हो। भोजन का समय भी इस तरह तय किया जाएगा कि वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को परेशानी न हो। पशु प्रेमियों को गोद लेने की अनुमति दी जाएगी लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कुत्ता दोबारा सड़क पर न लौटे।
यमुनानगर में 10 व गन्नौर में 5 साल बाद होगी नसबंदी
नगर निगम यमुनानगर में 10 साल बाद नसबंदी टेंडर जारी किया गया है। इसी तरह गन्नौर नगर पालिका में पांच साल बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है। सिवान, करनाल, कलानौर, हथीन, नीलोखेड़ी, खरखौदा, नारनौंद, तरावड़ी, घरौंडा, सिरसा, फरुखनगर, पुंडरी, कुंडली नगर पालिका व रोहतक, गुरुग्राम नगर निगम समेत कई निकायों में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सिरसा नगर परिषद ने अभियान चलाकर करीब 266 कुत्तों का बधियाकरण किया था। रोहतक में आश्रय स्थल में 70 कुत्ते हैं। तीन माह में 1,500 का बधियाकरण हुआ। सोनीपत में अस्थायी आश्रय स्थल है। रेवाड़ी और धारूहेड़ा में पहले ही टेंडर हो चुके हैं जमीन और फंड तय हो चुका है। जींद में आश्रय स्थल बना है। 700 कुत्तों को वैक्सीन लग चुकी है। कुरुक्षेत्र स्थित मिर्जापुर में बंद स्कूल में अस्थायी आश्रय स्थल है। एक सप्ताह में 50 कुत्ते पकड़े गए। यमुनानगर के जगाधरी में आश्रय स्थल है। फतेहाबाद में 2,130 कुत्तों का बधियाकरण हुआ। छह माह में 232 लोगों को रेबीज वैक्सीन लग चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन प्राथमिकता के साथ किया जाएगा। नसबंदी कार्यों में तेजी लाई जा रही है और इस सप्ताह अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे की रूपरेखा तय की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि जहां भी कुत्तों के लिए आश्रय स्थल नहीं हैं, वहां नए केंद्र बनाए जाएं। प्रारंभिक चरण में लगभग 5,000 कुत्तों को रखने की क्षमता वाले आश्रय स्थल तैयार किए जा रहे हैं। एजेंसियों से आवेदन मंगाए गए हैं और बड़े शहरों जैसे गुरुग्राम में तीसरा आश्रय स्थल खोलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
-विपुल गोयल, निकाय मंत्री हरियाणा