पूर्व सैनिकों, महिलाओं के रोजगार देने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलेगा। कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए प्रति प्रशिक्षु 20 हजार रुपये तक सहायता राशि का भी प्रावधान प्रस्तावित है। इनमें महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजनों और पूर्व सैनिकों को रोजगार देने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।
किसानों को 50 पैसे प्रति किलोग्राम प्रत्यक्ष लाभ
संयंत्रों से बनने वाली जैविक खाद खरीदने वाले किसानों को 50 पैसे प्रति किलोग्राम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सहायता देने का प्रस्ताव है। कृषि विश्वविद्यालय इसकी गुणवत्ता की निशुल्क जांच करेंगे। गोशालाओं, डेयरियों, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों को ऑनलाइन मंच से जोड़कर गांव स्तर पर गोबर, पराली और जैविक कचरे के संग्रह की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
2030 तक 3,000 टन प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2030 तक 3,000 टन प्रतिदिन, 2035 तक 10,500 टन प्रतिदिन और 2047 तक 43,000 टन प्रतिदिन कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना के लिए एकल खिड़की पोर्टल पर 10 हजार रुपये पंजीकरण शुल्क के साथ आवेदन करना होगा और संयंत्र को 24 माह में चालू करना अनिवार्य होगा। नीति को संचालित करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 25 सदस्यीय राज्य स्तरीय समीक्षा व समन्वय समिति, ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय कार्यकारी समिति और प्रत्येक जिले में उपायुक्त की अध्यक्षता में 17 सदस्यीय जिला कंप्रेस्ड बायोगैस समन्वय समिति गठित भी किया जाएगा।
तीन राज्यों में नीति लागू
उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार में सीबीजी नीति लागू है। अब हरियाणा सरकार का मसौदा तैयार है। असम ने इसी साल अपनी अलग सीबीजी नीति को मंजूरी दे दी है। पंजाब में नीति अलग से नहीं है लेकिन सीबीजी परियोजनाओं का क्रियान्वयन बड़े पैमाने पर चल रहा है।