अपराध की श्रेणी से बाहर होंगे छोट अपराध, कई अपराधों में जेल में जाने के बजाय जुर्माना लगाकर छोड़ा जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्र सरकार की तर्ज पर हरियाणा सरकार भी जन विश्वास विधेयक लाने की तैयारी में है। इस विधेयक से सुशासन में पारदर्शिता आएगी। राज्य में कारोबार करना भी आसान हो जाएगा। छोटी गलतियां अपराध की श्रेणी में नहीं आएंगी। कई अपराधों में जेल जाने के बजाय जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाएगा। जब कानून सरल होंगे और अनुपालन में कठिनाई नहीं होगी, तो राज्य में निवेश बढ़ेगा, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हालांकि हरियाणा सरकार इस दिशा में पहले से ही काम कर रही है।
तीन प्रमुख विभागों में 36 पुराने अधिनियमों को निरस्त किया और 37 छोटे आपराधिक प्रावधानों को हटाया गया है। वहीं, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने 37 विभागों के 230 से अधिक अधिनियमों की व्यापक समीक्षा शुरू की है। इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य सरकार मानसून सत्र में विधेयक ला सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक इस ऐतिहासिक विधेयक का उद्देश्य छोटे-मोटे अपराधों को अपराध से मुक्त करने के साथ-साथ नियामक बाधाओं को दूर करना और विभागों में अनुपालन बोझ को कम करना भी है। इससे आम जनता और उद्यमियों के लिए जीवन और व्यवसाय को आसान बनाना है। सरकार की सोच है कि न्याय की प्रक्रिया इतनी सरल हो कि आम नागरिक और व्यापारी बिना किसी परेशानी के अपना काम कर सके। शुक्रवार को कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक की अध्यक्षता में हुई बैठक में अनुपालन में कमी और और विनियमन को बढ़ावा देने की पहल की जानकारी दी गई।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार का दृष्टिकोण समग्र है। चाहे औद्योगिक स्वीकृतियों को सुव्यवस्थित करना हो, भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण हो या भवन बिल्डिंग कोड को सरल बनाना हो, हर उपाय का मकसद निवेशकों का भरोसा बढ़ाना और उद्यम को सहायता देना हो। उन्होंने आश्वासन दिया कि शेष सुधार केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित समय-सीमा में लागू कर दिए जाएंगे। विशेष सचिव केके पाठक ने हरियाणा की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को अनुपालन में कमी और विनियमन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राज्य से काफी उम्मीदें हैं। हरियाणा कई मामलों में दिल्ली से आगे निकल गया है।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डाॅ. अमित अग्रवाल ने कहा राज्य सरकार ने एक समर्पित राज्य-स्तरीय ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) प्रकोष्ठ की स्थापना की है, जो कानूनी प्रावधानों का विश्लेषण कर रहा है और सरलीकरण की सिफारिश कर रहा है।