यमुना और उससे जुड़े जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए हरियाणा सरकार ने सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, ठोस कचरे और जल स्रोतों के पुनरुद्धार पर एक साथ काम तेज करने का फैसला किया है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक में सोनीपत, पानीपत, करनाल, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और यमुनानगर की परियोजनाओं की प्रगति देखी गई। लंबित परियोजनाओं को योजना और निविदा स्तर से आगे बढ़ाकर तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
गुरुग्राम में धनवापुर और बहरामपुर में 100-100 एमएलडी, नौरंगपुर में 40 एमएलडी और सेक्टर-107 में 100 एमएलडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित हैं। इनकी वित्तीय और तकनीकी निविदाएं अगस्त-सितंबर में खोली जानी हैं।
फरीदाबाद के मिर्जापुर में 20 एमएलडी संयंत्र का काम 30 अगस्त तक शुरू करने और सूरजकुंड के 20 एमएलडी संयंत्र की तकनीकी निविदा 24 अगस्त तक खोलने का लक्ष्य है। सोनीपत के कुंडली में 7.5 एमएलडी और समालखा में 4 एमएलडी संयंत्र की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी साझा उपचार संयंत्र की निविदाएं जारी हो चुकी हैं। गुरुग्राम सेक्टर-34 के 20 एमएलडी संयंत्र की तकनीकी निविदा खुल चुकी है। बादशाहपुर में 15 एमएलडी और सेक्टर-37 में 9 एमएलडी संयंत्र समेत अन्य परियोजनाएं भी योजना में हैं।
यमुना किनारे के गांवों में सोनीपत, करनाल और पानीपत में थ्री-पोंड सिस्टम और छोटे सीवेज संयंत्रों से गंदे पानी का उपचार होगा। फरीदाबाद, करनाल, पानीपत और सोनीपत के 13 जल स्रोत, 19.12 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ, पुनरुद्धार के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें प्रदूषण का प्रमुख कारण घरेलू सीवेज पाया गया है और काम 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
योजना में 33 शहरी निकायों का ठोस कचरा प्रबंधन भी शामिल है। 27 में 22 वर्ष के अनुबंध हो चुके हैं, जबकि छह में निविदा प्रक्रिया जारी है। सोनीपत, फरीदाबाद और यमुनानगर में 400, 100 और 150 टन प्रतिदिन क्षमता के तीन बायोगैस संयंत्र प्रस्तावित हैं।