-एप लाॅन्च होने से पहले 20 जून तक सड़कों की गुणवत्ता के साथ ब्योरा करना है अपलोड
-फिलहाल सड़कों का चल रहा सर्वे, सड़क निर्माण से जुड़े विभागों से मांगा गया है ब्योरा
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। प्रदेश की सड़कों को पूरी तरह से गड्ढामुक्त करने की राह की सभी बाधाएं दूर होंगी। सरकार आमजन की शिकायतों को और तेजी से हल करने की योजना बना चुकी है। 20 जून के बाद राज्य सरकार हरपथ-2.0 पोर्टल एप्लीकेशन लॉन्च करेगी, इसलिए सड़क निर्माण से जुड़े प्रत्येक विभाग को 20 जून तक सर्वे का कार्य करके पोर्टल पर ब्योरा अपलोड करना है। हरपथ-2.0 एप पर आमजन सड़कों संबंधी शिकायत कर सकेंगे, जिनका समाधान तुरंत करवाया जाता है।
प्रदेश में गली से लेकर राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय मार्गों को ब्योरा तैयार किया जा रहा है। इसमें प्रत्येक सड़क की गुणवत्ता, लंबाई, चाैड़ाई आदि ब्योरा तैयार हो रहा है। हरपथ-2.0 के लॉन्च होने से पहले सड़क निर्माण से जुड़े विभागों से यह ब्योरा मांगा गया है, जिनमें लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण(एचएसवीपी), हाउसिंग बोर्ड, मार्केटिंग बोर्ड, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी), पंचायती राज आदि विभाग शामिल हैं। यह ब्योरा एप पर ही अपलोड करना है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग की मासिक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरपथ-2.0 को लेकर विशेष चर्चा की थी।
प्रदेश में 47,146 सड़कों का हुआ सर्वे
प्रदेश में अभी तक सभी 22 जिलों में 47,146 सड़कों का सर्वे किया जा चुका है। जियोग्राफिक इनफाॅर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) के माध्यम से सर्वे के दाैरान इनकी लंबाई 6495.3 किलोमीटर मापी गई है। सर्वे के लिए फील्ड मैप एप की मदद लेने को कहा गया है।
हरसैक ने विकसित किया है नया एप
हरपथ-2.0 एप्लीकेशन जीआईएस (जियोग्राफिक इनफाॅर्मेशन सिस्टम) पर आधारित है। सड़कों पर किसी भी प्रकार के गड्ढों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए हरसैक (हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र) ने इसे तैयार किया है। संबंधित विभागों को सर्वेक्षण के लिए प्रशिक्षित भी किया गया है। फील्ड मैप्स एप्लीकेशन के माध्यम से सड़क विशेषताओं को अपलोड करने के लिए आवश्यक सर्वेक्षण प्रशिक्षण आयोजित किए गए हैं।
हरपथ-1 में 2017 से अब तक 64 हजार शिकायतें आईं
प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए वर्ष 2017 में हरपथ योजना शुरू की गई। वर्ष 2017 से 25 मई 2025 तक कुल 64,346 शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि 52,505 शिकायतों का समाधान कर दिया गया। कुल 9575 शिकायतें हल होने योग्य नहीं थीं, इसलिए इन शिकायतों को रद्द किया गया। 18,327 शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो उनकी दोबारा से जांच शुरू की गई। साथ ही 2,266 शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश में 206 शिकायतों पर कार्य होना है। वहीं, समीक्षा बैठक के अनुसार अभी 1144 शिकायतों का समाधान हो चुका है या इनके समाधान के लिए कार्य जारी है।