-सरकार को 30 दिन के भीतर कार्रवाई का आदेश
-हरियाणा पशु चिकित्सक महासंघ ने दायर की है याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में पशु चिकित्सा सेवाओं में अव्यवस्था और झोलाछाप इलाज की बढ़ती प्रवृत्ति को पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को खामियां दूर करने का निर्देश दिया। साथ ही सरकार को याचिकाकर्ता के मांगपत्र पर 30 दिन के भीतर कार्रवाई का आदेश दिया है।
हरियाणा पशु चिकित्सक महासंघ ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि राज्य में हजारों वेटरनरी लाइवस्टाक डेवलपमेंट असिस्टेंट (वीएलडीए) कार्यरत हैं जो पशु चिकित्सकों की अनुपस्थिति में स्वतंत्र रूप से चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। याची ने कहा कि यह भारतीय पशु चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1984 की धारा 30 का उल्लंघन है। याची ने कहा कि वीएलडीए केवल प्राथमिक सेवाएं ही दे सकते हैं और वह भी पंजीकृत पशु चिकित्सक की देखरेख में। पर जमीनी हकीकत यह है कि एक चिकित्सक को 30–40 किमी के दायरे में चार से पांच डिस्पेंसरियां की जिम्मेदारी दी जाती है। इतना बड़ा क्षेत्र होने के चलते प्रभावी निरीक्षण संभव नहीं हो पाता। इस ढीले प्रशासनिक ढांचे के कारण झोलाछाप पशु चिकित्सा सेवाएं फलने-फूलने लगीं। इससे न केवल पशुओं का जीवन खतरे में पड़ा है बल्कि आमजन के स्वास्थ्य और राज्य की पशुधन अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसका नतीजा यह हुआ कि झोलाछाप उपचार ने राज्य में जड़ें जमा लीं। कोर्ट को बताया गया कि कई स्तर पर इस बाबत शिकायत करने के बाद भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। इसलिए याची को मजबूरन हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता द्वारा 18 जून 2018 को भेजे गए दोनों ज्ञापनों पर विचार कर 30 दिन के भीतर स्पष्ट और कारण सहित आदेश पारित किया जाए और याचिकाकर्ता को उसकी सूचना दी जाए।