-कांग्रेसी नेता करण सिंह दलाल ने 2002 में दायर की थी याचिका
-करीब 23 साल से हाईकोर्ट में विचाराधीन है इस मुद्दे को लेकर याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। वर्ष 2002 में ओमप्रकाश चौटाला के शासन काल में हुई 65 एचसीएस अधिकारियों की नियुक्तियों में धांधली के खिलाफ याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अंतिम सुनवाई 8 मई को तय की है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला लगभग 22 साल से हाईकोर्ट में विचाराधीन है। वर्ष 2002 में जब एचसीएस पदों के लिए नियुक्ति की गई थी, तब इन नियुक्तियों को कांग्रेस नेता करण सिंह दलाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। इस विवाद के हाईकोर्ट में आने के बाद इन उत्तर पुस्तिकाओं की ओरिजिनल कापी हाईकोर्ट में मंगवा ली गई थी। 2009 में विजिलेंस के अनुरोध पर उनकी फोटो कापी विजिलेंस को उपलब्ध करवाई गई थी। पिछले साल विजिलेंस ने एक अर्जी दायर कर 35 एचसीएस अधिकारियों की 54 उत्तर पुस्तिकाओं की ओरिजिनल कापी मांगी थी। विजिलेंस ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर कहा था कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए ओरिजिनल उत्तर पुस्तिकाओं की जरूरत है। उत्तर पुस्तिकाओं में कांट-छांट, जोड़ना-घटाना और स्याही आदि की जांच फाॅरेंसिक लैब में होगी तो जांच को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा। आरोप लगाए गए थे कि तत्कालीन चौटाला सरकार ने नियमों का उल्लंघन कर अपने चहेतों को नियुक्ति दी, जिनके परीक्षा में कम अंक थे, उनके इंटरव्यू में अधिक अंक देकर नियुक्त किया गया। इस मामले में की गई जांच में भी धांधली सामने आई थी।
वर्ष 2013 में हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस ने याचिका पर सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। लेकिन इसी बीच वह सुप्रीम कोर्ट चले गए और यह केस फिर सुनवाई पर आ गया। तब से लेकर अब तक हाई कोर्ट की विभिन्न खंडपीठों में इस केस की सुनवाई चल रही है।