अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश की मंडियों में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी कम दाम मिल रहे हैं। कुरुक्षेत्र, अंबाला, करनाल, कैथल और आसपास के क्षेत्रों की मंडियों में मक्की की आवक जोरों पर है, लेकिन किसानों को 2400 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने की बजाय सिर्फ 1000 से 1400 रुपये का ही रेट मिल रहा है। पूरी तरह सूख चुकी फसल का रेट भी ज्यादा से ज्यादा 1800 रुपये तक ही मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाया है।
हुड्डा ने कहा कि सरकार द्वारा लगातार किसानों पर दबाव बनाया जाता है कि धान छोड़कर मक्का की खेती करें। इसके लिए हर साल प्रोत्साहन राशि का भी ऐलान किया जाता है। लेकिन हर बार किसानों को धोखा ही हाथ लगता है। उन्हें ना प्रोत्साहन राशि मिल पाती है और ना ही एमएसपी मिलता है।
हुड्डा ने कहा कि भाजपा ने चुनावों से पहले सत्ता में आने पर धान को 3100 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर खरीदने का दावा किया था। अब सरकार की नीतियों के कारण किसानों को लागत से भी कम दाम पर अपनी फसल बेचनी पड़ती है। 2025-26 विपणन सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 2425 रुपये प्रति कुंतल और धान का एमएसपी 2300 रुपये प्रति कुंतल तय किया था, लेकिन ये रेट सिर्फ कागजी साबित होते हैं। किसानों को मंडियों में गेहूं और धान 300 से 400 रुपये कम रेट पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है।