क्यों शुरू हुई थी हड़ताल?
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी 'इलेवन पावर' को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मी तीन दिन की हड़ताल पर चले गए थे। बुधवार रात दस बजे से शुरू हुई इस हड़ताल ने उद्योगों से लेकर अस्पतालों, स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और आम जनजीवन को पूरी तरह से ठप कर दिया था। स्थिति को संभालने के लिए इससे पहले ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की थी और सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही थी।
हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस
पंचकूला के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, ऊर्जा मंत्री अनिल विज और मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की विशेष मौजूदगी रही। वहीं, कर्मचारी संगठनों की ओर से संयुक्त मोर्चा के नेता देवेंद्र हुड्डा और अनुबंधित कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जीवन सिंह ठाकुर भी मौजूद रहे।
निजीकरण के खिलाफ थी हड़ताल
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी यह हड़ताल बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में थी। बातचीत के बाद सरकार ने उनकी मांगों पर सहमति जताई है, जिसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। संयुक्त मोर्चा के देवेंद्र हुड्डा और अनुबंधित कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जीवन सिंह ठाकुर ने संयुक्त रूप से ऐलान किया कि सभी कर्मचारी तुरंत अपनी हड़ताल खत्म कर काम पर लौटेंगे और युद्धस्तर पर बिजली बहाली के काम में जुट जाएंगे ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
हड़ताल के दौरान राज्य में दिखा व्यापक असर
हड़ताल का सबसे बुरा असर औद्योगिक इकाइयों पर पड़ा। सोनीपत, करनाल, रोहतक, रेवाड़ी, बहादुरगढ़, नारनौल, हिसार और गुरुग्राम में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अकेले गुरुग्राम के उद्यमियों ने एक दिन में 1500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित होने का दावा किया, जहाँ दौलताबाद और मानेसर समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में मशीनें पूरी तरह बंद रहीं।
अस्पताल और स्कूल प्रभावित
भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल और पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में करीब पांच घंटे बिजली गुल रहने से मरीजों और चिकित्सकों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। वहीं करनाल में फीडर बंद रहने के कारण स्कूल बंद करने पड़े, जबकि सिरसा और भिवानी के लघु सचिवालयों में कर्मचारियों को अंधेरे में काम करना पड़ा।
गांवों से लेकर शहरों तक ब्लैकआउट
आठ जिलों के कम से कम 1198 गांवों और कॉलोनियों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। यमुनानगर, पानीपत, रेवाड़ी, रोहतक, कैथल और फरीदाबाद के कई इलाकों में लोगों को 15 से 16 घंटे तक बिजली और पानी के संकट से जूझना पड़ा। वीरवार शाम तक 11 जिलों में 22,853 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं।
अनाज मंडियों में ठप रहा काम
जीटी बेल्ट की अनाज मंडियों (यमुनानगर, जगाधरी, करनाल, कैथल, सिरसा) में बिजली न होने के कारण धान की सफाई, तुलाई और उठान का कार्य बाधित हुआ। कई जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटे और इन्वर्टर जवाब दे गए, जिसके बाद आढ़तियों को निजी जनरेटरों का प्रबंध करना पड़ा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच चली बैठकों के दौर के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ हुई बैठक में सहमति बनी, जिसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी।