चंडीगढ़। साल 2002-2004 बैच के आठ एचसीएस अधिकारियों के प्रमोशन पर फैसला अब कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) लेगा। हरियाणा सरकार तीसरी बार आठों अधिकारियों से संबंधित तथ्यों को डीओपीटी के सामने रखेगा। इन अफसरों के खिलाफ अदालत में एक मामले में चार्जशीट दायर पर केंद्र ने प्रमोशन के प्रस्ताव को वापस भेज दिया था। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि चार्जशीट को अंतिम रिपोर्ट न माना जाए।
सरकार ने मार्च में 2002, 2003 और 2004 बैच के 27 एचसीएस अधिकारियों को आईएएस अधिकारियों के रूप में पदोन्नति देने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन केंद्र ने 2002 बैच के आठ एचसीएस अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने की वजह से प्रस्ताव को वापस भेज दिया था।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने हिसार की अदालत में 2023 में एक आरोपपत्र दायर किया था, जिसमें 2002 बैच के एचसीएस अधिकारियों की भर्ती में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर केंद्र ने सॉलिसिटर जनरल से इस बारे में राय मांगी थी। सॉलिसिटर जनरल ने अपनी राय में बताया था कि ऐसे सभी मामले जहां सीआरपीसी की धारा 173 के तहत रिपोर्ट दाखिल की जाती है, उसे निर्धारित आरोपपत्र दाखिल करने के रूप में माना जाता है। राज्य सरकार ने जिन 27 अफसरों के नाम पदोन्नति के लिए भेजा था, उनमें 2020 बैच के लिए तीन, 2021 बैच के लिए चार, 2022 बैच के लिए आठ, 2023 बैच के लिए 10 और 2024 बैच के लिए दो रिक्तियां हैं।
सॉलिसिटर जनरल की राय आने पर केंद्र ने राज्य सरकार को इस मामले में सभी तथ्यों की बारीकी से जांच करने के बाद दोबारा से प्रस्ताव भेजने को कहा था।
अब राज्य सरकार नया प्रस्ताव बनाते समय सॉलिसिटर जनरल की ओर से दी गई राय को ध्यान में रखकर केंद्र को प्रस्ताव भेजेगा। 2002 बैच के एचसीएस अधिकारियों के पदोन्नति पर कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने भी आपत्ति जताई थी। उनकी दलील थी कि एसीबी ने 2002 बैच के एचसीएस अधिकारियों के चयन में अनियमितता पाई थी। इन अधिकारियों को जालसाजी व धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार समेत कई अपराधों के लिए चार्जशीट किया जा चुका है। ब्यूरो