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ट्रॉली से हादसा, बीमा कंपनी नहीं कर सकती मुआवजे से इन्कार: हाईकोर्ट

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-ट्रॉली का अलग से बीमा न होने की बीमा कंपनी की दलील को हाईकोर्ट ने किया खारिज
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-पशु चारा ले जाने को कॉमर्शियल कार्य बताने की दलील भी हाईकोर्ट ने की खारिज

विवेक शर्मा
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि यदि ट्रॉली-ट्रैक्टर से जुड़ी है और उससे हादसा होता है तो बीमा कंपनी को मुआवजे का भुगतान करना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में ट्रॉली का अगल से बीमा होना अनिवार्य नहीं है।
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याचिका दाखिल करते हुए सिरसा निवासी मालिक साहिब ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे मृतक के आश्रितों को मुआवजा राशि जारी करने का आदेश दिया गया था। 17 मार्च 2003 को कृष्ण कुमार ट्रैक्टर लेकर मंडी डबवाली के लिए निकला था। उसके साथ लेबर के तौर पर राम चंद्र भी मौजूद था, जिसका काम पशु चारे को ट्रॉली पर लोड और अनलोड करना था। मंडी से वापसी के दौरान राम चंद्र ट्रॉली पर चारे की रखवाली कर रहा था। इस दौरान वह बिजली की तार की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। राम चंद्र के आश्रितों ने मुआवजे के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में गुहार लगाई थी। एमएसीटी सिरसा ने इस मामले में बीमा कंपनी को मुआवजे से मुक्त करते हुए याची जो वाहन का मालिका था उसे जिम्मेदार ठहराया। बीमा कंपनी की दलील थी कि ट्रॉली का अगल से बीमा नहीं था। साथ ही वाहन का कॉमर्शियल उपयोग किया जा रहा था, जो बीमा की शर्त का उल्लंघन था। हाईकोर्ट में याची ने इस आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए कहा निश्चित तौर पर पशु चारा ढोना कृषि का हिस्सा है, इसे किसी भी प्रकार से कॉमर्शियल कार्य नहीं कहा जा सकता है। एमएसीटी ने इस मामले में बीमा कंपनी को मुआवजे की जिम्मेदारी से मुक्त करके बड़ी गलती की है, जिसमें सुधार की जरूरत है। हाईकोर्ट ने वाहन मालिक को मुआवजे की जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश दिया है।
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