- जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हत्या के मामले में अदालत ने दिया था दोषी करार
- याची के स्वास्थ्य का ब्योरा दें और बताएं कि क्या जेल में इलाज संभव या नहीं : हाईकोर्ट
चंडीगढ़। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए व उम्रकैद की सजा काट रहे दलजीत सिंह ने अपनी बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए पैरोल की मांग की है। याची ने कहा कि उसकी बिगड़ी हालत के बावजूद उससे जेल में टॉयलेट साफ करवाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने अब हरियाणा सरकार को याची के स्वास्थ्य से जुड़ा ब्योरा सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही पूछा कि क्या उनका इलाज जेल में संभव है या नहीं।
याचिका दाखिल करते हुए दलजीत ने बताया कि हत्या के मामले में याची को दोषी मानते हुए ट्रायल कोर्ट ने 31 जनवरी 2019 उम्रकैद की सजा सुनाई थी। याची ने बताया कि आंदोलन के समय पर वह सर्व जातीय रोघी खाप का प्रधान था और ऐसे में उसके खिलाफ साजिश रची गई थी। उसको अदालत से मां के इलाज के लिए पैरोल मिली थी और इस दौरान उस पर हमला हुआ था। इस हमले में उसे चार गोलियां गली थी और उसकी टांग की स्थिति बेहद खराब है।
याची ने कहा कि डाॅक्टरों ने उसे व्यायाम व साइकिलिंग की सलाह दी थी लेकिन उसे जेल में कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। याची ने कहा कि यदि उसके इलाज में लापरवाही हुई तो उसे उसकी टांग गंवानी पड़ सकती है और ऐसे में याची ने पैरोल के लिए आवेदन किया था जिसे सरकार ने खारिज कर दिया था। याची ने बताया कि उसकी इस बिगड़ी स्थिति के बावजूद उसे बैरक से निकलने की मंजूरी तक नहीं है। याची से इस समय टॉयलेट साफ करवाया जा रहा है जो उसकी हालत और खराब कर सकता है। याची ने हाईकोर्ट से पैरोल देने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने अब इस मामले में हरियाणा सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।