चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति को प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक नजरबंदी) में रखने के लिए ठोस, विश्वसनीय और निकट भविष्य में अपराध की आशंका से जुड़े सबूत जरूरी हैं। सिर्फ पुराने मामलों या अस्पष्ट आशंकाओं के आधार पर ऐसा कदम नहीं उठाया जा सकता। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए हिसार की एक महिला बबली की नजरबंदी को रद्द कर तत्काल रिहाई के आदेश दिए।
जस्टिस सुवीर सहगल ने कहा कि प्रिवेंटिव डिटेंशन एक असाधारण शक्ति है जिसका प्रयोग बेहद सोच-समझकर होना चाहिए। राज्य सरकार यह साबित करने में नाकाम रही कि याचिकाकर्ता के पुराने मामलों और उसके खिलाफ नजरबंदी की जरूरत के बीच कोई सीधा और ताजा संबंध मौजूद है।
बबली को 30 मई और 1 अगस्त 2025 के आदेशों के आधार पर छह महीने के लिए नजरबंद किया गया था। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तीन मामले दर्ज थे। उसकी बेटी की ओर से की गई मांग को भी 30 जून को खारिज कर दिया था। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि तीनों मामलों में केवल कम या मध्य मात्रा की बरामदगी हुई थी एक मामले में ही सजा हुई थी व बाकी मामलों में वह जमानत पर थी और सभी शर्तों का पालन कर रही थी। उन्होंने हाईकोर्ट के हालिया फैसले लखविंदर सिंह उर्फ भिंडी बनाम राज्य हरियाणा का हवाला दिया जिसमें कहा था कि कई एनडीपीएस मामलों में नामजद होना नजरबंदी का आधार नहीं बन सकता।
दूसरी ओर राज्य सरकार ने दलील दी कि हिसार में इस वर्ष 121 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए हैं और याची 562 चिह्नित ड्रग आरोपितों के नेटवर्क का हिस्सा है। पुलिस ने उसे आदतन तस्कर बताया और कहा कि पुलिस डोजियर में उसकी गतिविधियों का विवरण है। अदालत ने रिकार्ड की जांच के दौरान कई खामियों की ओर इशारा किया। कोर्ट ने कहा कि एक मामले में आरोपित की जमानत रद्द करने की याचिका को खुद अभियोजन ने आगे नहीं बढ़ाया। वहीं, जिस पुलिस स्रोत रिपोर्ट का हवाला देकर यह दावा किया गया कि वह सक्रिय रूप से नशा तस्करी कर रही है, वह रिपोर्ट न तो रिकाॅर्ड पर रखी गई और न ही बहस के दौरान पेश की जा सकी। अदालत ने 2020 के पहले एफआईआर को भी बासी सामग्री बताया और कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के अमीना बेगम बनाम राज्य तेलंगाना फैसले के मुताबिक नजरबंदी के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती।
इन सब आधारों पर अदालत ने नजरबंदी के सभी आदेश रद्द कर दिए और निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में हिरासत जरूरी न हो, तो बबली को तुरंत रिहा किया जाए।