- श्रम विभाग ने सभी आयोगों के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए
- एक सप्ताह में लंबित मामलों की स्थिति रिपोर्ट मांगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, हरियाणा मानवाधिकार आयोग समेत राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय आयोगों से जुड़े निर्देशों के पालन में देरी अब अधिकारियों को भारी पड़ सकती है। हरियाणा श्रम विभाग की तरफ से निर्देश जारी किए गए कि आयोगों के निर्देश, संदर्भ व सलाह पर कार्रवाई में किसी भी तरह की लापरवाही या प्रशासनिक देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी के खिलाफ सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अभी तक इस तरह की सख्ती नहीं होती थी।
श्रम आयुक्त कार्यालय ने आदेश जारी कर मुख्यालय की सभी शाखाओं और क्षेत्रीय कार्यालयों में तैनात उप श्रम आयुक्तों तथा सहायक श्रम आयुक्तों को आयोगों से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर निपटाने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर ऐसे सभी मामलों की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी है। इसमें प्रत्येक मामले में अब तक की गई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति का पूरा ब्योरा देना होगा। तीन सितंबर से पहले प्राप्त या अब तक लंबित मामलों की अलग से जानकारी भी देनी होगी। लंबित जवाबों को सक्षम अधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित आयोग के निर्धारित ऑनलाइन माध्यम पर तय समय में भेजना होगा। इसकी सूचना श्रम मुख्यालय को भी देनी होगी। आयोगों से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए संयुक्त श्रम आयुक्त को नोडल अधिकारी बनाया गया है।