अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने हरियाणा सरकार द्वारा गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में गठित राज्य स्तरीय ‘श्री गुरु रविदास जी समरसता संकल्प अभियान’ समिति के गठन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर समिति का पुनर्गठन और विस्तार करने की मांग की है।
सांसद वरुण चौधरी ने आरोप लगाया है कि पांच अगस्त 2026 को गठित इस समिति में केवल सत्ता पक्ष के सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों और भाजपा नेताओं को ही स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के किसी भी प्रमुख नेता को समिति में शामिल नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि अनुसूचित जाति वर्ग से हरियाणा के तीन सांसद होने के बावजूद, समिति में उनमें से किसी को भी प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
वरुण चौधरी ने गुरु रविदास जी के समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी जयंती से जुड़े सरकारी अभियान की समिति में विपक्ष और अनुसूचित जाति वर्ग के निर्वाचित प्रतिनिधियों को दरकिनार करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि समिति में केवल सत्ता पक्ष के नेताओं को ही शामिल किया जाएगा, तो इसे सामाजिक समरसता कैसे कहा जा सकता है।
कांग्रेस सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि गुरु रविदास जी किसी एक राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और मानवता के संत थे। इसलिए, उनकी जयंती के सरकारी आयोजनों को राजनीतिक प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के धन से आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रमों में सभी वर्गों और राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
चौधरी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि समिति में सभी राजनीतिक दलों के सांसदों, विधायकों, पूर्व जनप्रतिनिधियों, सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों को शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जयंती मनाने का अवसर समाज को जोड़ने का है, न कि राजनीतिक लाभ उठाने का।