प्रदेश में कुल 49,12,197 संपत्तियां, अभी तक केवल 16,41,904 संपत्तियों का ही स्वयं सत्यापित का कार्य हुआ
छह माह पहले 30 प्रतिशत हुआ था काम, 27 जनवरी तक 32 प्रतिशत और 21 अप्रैल तक केवल 33 प्रतिशत काम हुआ
चंडीगढ़। प्रदेश की निकाय संस्थाएं स्वयं सत्यापन का कार्य तेजी से नहीं करा सकीं। पिछले करीब छह माह से अब तक तीन प्रतिशत कार्य ही हो सका है और इस साल 27 जनवरी से 21 अप्रैल तक कार्य में केवल एक प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हो सकी है। इससे साफ संकेत हैं कि सभी आठ श्रेणियों में संपत्ति मालिकों की समस्याएं दूर करने में देरी हो रही है।
संपत्तिकर देरी से आने के कारण भी इस कार्य में देरी हो रही है। प्रदेश में 11 नगर निगम हैं, जबकि नगर पालिकाएं और नगर परिषदों की संख्या 87 हैं। संपत्तिकर जमा कराने से पहले उपभोक्ताओं को अदेयता प्रमाणपत्र (एनडीसी पोर्टल) से प्राप्त करना होता है।
संपत्तिकर जमा कराने या बकाया भुगतान से पहले प्रमाणपत्र पाने के लिए उपभोक्ताओं को सभी प्रकार की त्रुटियां दूर होने की जानकारी देनी होती है। उपभोक्ताओं के मोबाइल पर ओटीपी यानी वन टाइम पासवर्ड आता है। प्रदेश की बात करें तो चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश में 49,12,197 संपत्तियां हैं, जिनमें से केवल 16,41,904 संपत्तियों का उपभोक्ताओं की ओर से स्वयं सत्यापित का कार्य हो सका है।
संपत्ति श्रेणी : कुल संपत्तियां : स्वयं सत्यापित : 21 अप्रैल तक हुआ कार्य (प्रतिशत में)
1. रिहायशी : 25,77,743 : 10,85,774 : 42
2. व्यवसायिक : 4,70,380 : 1,96,385 : 42
3. औद्योगिक : 57,974 : 22,801 : 39
4. संस्थान : 38,115 : 11,392 : 30
5. खाली प्लाट : 11,88,463 : 1,75,965 : 15
6. विशेष श्रेणी : 54,086 : 21,637 : 40
7.मिश्रित उपयोग : 2,85,836 : 1,22,242 : 43
8. कृषि : 2,39,600 :55,708 :02
प्रदेश में कुल संपत्तियां : 49,12,197
प्रदेश में हुआ सेल्फ सर्टिफिकेशन का कार्य : 16,41,904
22 अक्तूबर 2024 तक हुआ था कार्य : 30 प्रतिशत
27 जनवरी 2025 तक हुआ था कार्य : 32 प्रतिशत
21 अप्रैल 2025 तक हुआ कार्य : 33 प्रतिशत
नोट : सभी आंकड़े 21 अप्रैल 2025 तक के हैं।