पड़ोसी राज्यों से मिलकर होगा काम
ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत हरियाणा पुलिस पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली व चंडीगढ़ के साथ समन्वय कर सीमावर्ती इलाकों में चेकिंग, संयुक्त कार्रवाई और कस्टडी ट्रांसफर तेज किए जाएंगे। लक्ष्य यह है कि फरार अपराधी राज्य बदलकर बच न निकलें।
फोकस दिखावे पर नहीं, बल्कि नतीजों पर
इस ऑपरेशन की भाषा और तरीका सरल और सीधा है। फोकस दिखावे पर नहीं, बल्कि काम के नतीजों पर है। कितने गिरफ्तार हुए, किन मामलों में जमानत रद्द हुई, कहां संगठित अपराध की धाराएं लगीं, कितनी संपत्ति जब्त हुई और क्या नई वारदातें रोकी गईं। नागरिकों के लिए आईजी क्राइम का नंबर साझा करना इस बात का संकेत है कि पुलिस सूचना को महत्व दे रही है और पहचान की गोपनीयता सुनिश्चित करेगी।
अपराधियों की पहचान, तलाश और गिरफ्तारी
सबसे बदनाम 5/10/20 की सूची सिर्फ कागज नहीं, बल्कि प्राथमिकता तय करने का टूल है। इससे संसाधन और समय वहीं लगेंगे जहां जोखिम सबसे ज्यादा है। थानों को पहचान, तलाश और गिरफ्तारी तीनों मोर्चों पर साथ काम करना होगा। पहचान में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, स्थानीय सूचनाएं और ट्रांजिट पॉइंट की निगरानी मदद करेगी। जमानत रद्द कराने के लिए ताजा गतिविधियों के रिकॉर्ड और साक्ष्य के साथ अदालत जाना होगा। जहां नेटवर्क और फंडिंग दिखे, वहां संगठित अपराध की धाराएं लगेंगी और संपत्ति जब्ती होगी, ताकि दोबारा अपराध करने की ताकत टूटे।
16 दिनों में गिरफ्तारी
यह भी साफ संकेत है कि हर स्तर पर नाम लेकर जिम्मेदारी तय की जा रही है कि किस एसएचओ और डीएसपी के इलाके की सबसे बदनाम 5 सूची में कौन-कौन हैं। जिला/जोन की सबसे बदनाम 10 का स्टेट्स क्या है। एसटीएफ की सबसे बदनाम 20 पर कितनी प्रगति हुई। 16 दिनों में गिरफ्तारी, अदालत में दायर याचिकाएं, वारंट की तामील और सीमाओं पर समन्वित कार्रवाई जैसे सूचकांकों से सफलता मापी जाएगी।