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Chandigarh-Haryana News: एम3एम समूह के केस से चीफ जस्टिस ने खुद को किया अलग किया

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-चीफ जस्टिस के याचिका पर सुनवाई करने पर याची ने जताई थी आपत्ति, मामला अन्य बेंच को रेफर
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अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। एम3एम समूह के निदेशक रूप बंसल की एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका की सुनवाई से चीफ जस्टिस शील नागू ने खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने स्वत: संज्ञान लेते हुए यह सवाल उठाया कि क्या वह उस मामले की न्यायिक सुनवाई कर सकते हैं, जिसे उन्होंने पहले प्रशासनिक रूप से निपटाया था।
सुनवाई शुरू होते ही चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या प्रशासनिक रूप से मामले को एकल पीठ से वापस लेने के बाद उनकी न्यायिक सुनवाई में किसी को आपत्ति है। बंसल की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोई लिखित आपत्ति नहीं थी लेकिन उनके मुवक्किल ने औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज करने का निर्देश दिया था। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, पूर्ण निष्पक्षता में, मैं इस मामले को सुनवाई के लिए किसी अन्य पीठ को सौंपूंगा। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील जोहेब हुसैन ने वीसी के जरिए पेश होकर आपत्ति का विरोध किया और चेतावनी दी कि यह खतरनाक नजीर स्थापित कर सकता है। उन्होंने कहा, चीफ जस्टिस का कार्यालय प्रशासनिक पक्ष में जो करता है, वह कभी भी न्यायिक निर्णय में बाधा नहीं बनता, क्योंकि मामलों का आवंटन चीफ जस्टिस की रोस्टर के मास्टर होने की प्रकृति का हिस्सा है।
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चीफ जस्टिस ने कहा कि पहले ऐसी कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी। मैं इस मामले के बारे में सोच रहा था कि यह एक आपत्ति हो सकती है लेकिन किसी ने इसे नहीं उठाया। सिंघवी ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से मामले में बहस करने में कोई कठिनाई नहीं थी लेकिन उनके मुवक्किल ने विशेष रूप से इस बिंदु को उठाने का निर्देश दिया था। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब चीफ जस्टिस ने मौखिक और लिखित शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए एकल न्यायाधीश से मामले का रिकाॅर्ड मंगवाया और सुनवाई की थी साथ ही फैसला सुरक्षित रखा था। बंसल भ्रष्टाचार मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग कर रहे थे।
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