हरिद्वार से कांवड़ लेने गए चंडीगढ़ के 17 सदस्यीय दल के 4 नाबालिगों की मौत हुई है। मृतकों में भरत, रोहित, शिवांश और नीतिश शामिल हैं। यह सभी युवा दूसरी बार हरिद्वार में कांवड़ लेने के लिए गए थे।
हरिद्वार में कांवड़ लेने गए चंडीगढ़ के चार किशोरों की गंगा में डूबने से माैत के बाद सेक्टर-26 स्थित बापूधाम कॉलोनी में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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हरिद्वार से कांवड़ लेने गए चंडीगढ़ के 17 सदस्यीय दल के 4 नाबालिगों की मौत हुई है। मृतकों में शामिल भरत, शिवांश और नीतिश सेक्टर-30 में आसपास ही रहते थे और दोस्त थे। भवानी प्रजापति का बेटा रोहित भी इनमें शामिल था। यह सभी युवा दूसरी बार हरिद्वार में कांवड़ लेने के लिए गए थे।
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रोहित के छोटे भाई अमित प्रजापति ने बताया कि 30 जुलाई को कॉलोनी के करीब 17-18 युवक और किशोर ट्रेन से हरिद्वार कांवड़ लेने गए थे। शुक्रवार दोपहर करीब एक से तीन बजे के बीच सभी गंगा में स्नान कर रहे थे। इसी दौरान एक किशोर गहरे पानी में फंस गया। उसे बचाने के लिए रोहित गंगा में उतरा, लेकिन वहां दलदल और तेज बहाव के कारण वह भी फंस गया।
अमित ने बताया कि रोहित को बचाने के लिए दो अन्य किशोर भी पानी में उतर गए। उन्हें तैरना नहीं आता था। एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में चारों गहरे पानी में फंस गए और डूब गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
परिजनों के अनुसार, रोहित के पिता भवानी दीन प्रजापति पिछले करीब 10 वर्षों से सेक्टर-29 में परांठों की दुकान चलाते हैं। रोहित अपने भाई के साथ पिता के काम में हाथ बंटाता था। साथ ही वह मुक्त विद्यालय से दसवीं कक्षा की पढ़ाई भी कर रहा था। हादसे के बाद परिवार और कॉलोनी के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
सफेद टेंट देखकर हुई बेहोश
वहीं भरत की मां माधवी को इस बात की जानकारी काफी समय तक नहीं दी गई। हां, उनको यह जरूर मालूम पड़ा कि हरिद्वार में ऐसी घटना हुई है और लड़के सेक्टर के ही हैं। लेकिन उनका बेटा भी इसी में शामिल था इसी वजह से वह घर के बाहर आ गईं।
सेक्टर-30 में रहने वाले यादविंदर मेहता ने बताया कि भरत की मां माधवी को जानकारी मिली थी कि कुछ बच्चे हरिद्वार में डूब गए हैं। वह अपने घर से बाहर निकलकर बैठी थीं। एकदम से उन्होंने देखा कि कुछ लोग सफेद टेंट लेकर आ रहे हैं। जैसे ही वह घर के सामने टेंट लेकर पहुंचे तो मां एकदम से सन्न रह गई और रो-रोकर बुरा हाल हो गया। कुछ समय के लिए वह बेहोश भी हो गई। आसपास के लोगों ने कहा कि बच्चा ठीक हैं...यह टेंट शायद किसी और के घर के लिए होगा तब जाकर पानी पिया और शांत हुईं पर बाहर ही बैठीं रहीं।
शिवांशु की बहन कनिका को जैसे ही अपने भाई जानकारी मिली तो वह सन्न रह गई। उसको आकर कुछ सहेलियों ने संभाला। शिवांशु और भरत के दोस्त और सेक्टर के निवासी दोनों घरों के पास पहुंच गए और देर रात तक यहीं पर खड़े रहे। शिवांशु के पिता पवन को जैसे ही इसकी जानकारी मिली तो वह गाड़ी से अपने हरिद्वार के लिए रवाना हो गए।
एक साल पहले हुई है पिता की मौत
सेक्टर-30 के मकान नंबर 1581/1 के 16 वर्षीय भरत के पिता हरीश कुमार की मौत एक साल पहले हो चुकी थी। भरत अपने परिवार में दूसरे नंबर पर था। उसका एक बड़ा भाई है और एक छोटी बहन। भरत की मां माधवी की रोते रोते बुरा हाल हो गया। भरत दसवीं कक्षा का छात्र था। 29 जुलाई को चंडीगढ़ से अपने दल के साथ निकला था।
सदम में बहन, पिता भी अवाक
1588/2 सेक्टर-30 के रहने वाला शिवांशु 12वीं कक्षा का छात्र था। उनके पिता पवन चादरों की फेरी का काम करते हैं। यह अपने परिवार में सबसे बड़ा भाई है। शिवांशु की बहन कनिका उसकी इकलौती बहन हैं। 1441/1 का रहने वाला नीतिश दसवीं कक्षा का छात्र था। उसके पिता राजेश ट्रेलर हैं और किसी तरह से अपना घर चलाते हैं। नीतिश अपने घर में मंझला बेटा था, उसके दो बहने हैं। उसकी दोनों बहनों का रो रोकर बुरा हाल है।