केंद्र और दोनों राज्यों के अधिकारियों की बनेगी संयुक्त समिति
यमुना से अब तक निकाला जा चुका है 16 हजार मीट्रिक टन कचरा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यमुना नदी को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिए केंद्र, हरियाणा और दिल्ली की सरकार अब मिलकर काम करेगी। यह फैसला नई दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस दौरान तय किया गया कि गंगा नदी के तर्ज पर यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए केंद्रीय जल आयोग, हरियाणा और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित की जाएगी। यह समिति यमुना की साफ सफाई के साथ अन्य समस्याओं के समाधान पर भी कार्य करेगी।
बैठक के बाद प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली में सरकार बनने के बाद से योजनाओं को तीव्र गति से तैयार किया जा रहा है और उन्हें धरातल पर उतारने का कार्य निरंतर जारी है। नदी में गिरने वाले गंदे पानी के नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के माध्यम से स्वच्छ करके नदी में प्रवाहित करने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। सफाई अभियान के तहत अब तक 16 हजार मीट्रिक टन कचरा यमुना नदी से निकाला जा चुका है।
हरियाणा से यमुना में गिरने वाली ड्रेनों में हो रहा सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि करनाल के पल्ला गांव से यमुना नदी में गिरने वाली ड्रेन का बीओडी (जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग) स्तर 80 है। इस पानी को और अधिक स्वच्छ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फरीदाबाद के ओखला में यमुना के पानी के बीओडी स्तर में सुधार हुआ है। इसकी गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए 44 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनसे प्रतिदिन लगभग 620 एमएलडी पानी शुद्ध किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 510 एमएलडी (मेगा लीटर प्रति दिन) पानी को स्वच्छ बनाने के लिए नाै और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
प्रदूषित पानी सीधे यमुना में नहीं डाला जाएगा
सीएम सैनी ने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी कीमत में प्रदूषित पानी को सीधे यमुना में न डाला जाए। नजफगढ़ झील और ड्रेन की भी निगरानी करने के लिए दिल्ली, हरियाणा के प्रतिनिधियों व विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएंगी। हरियाणा के उद्योगों से निकलने वाले दूषित पानी के बीओडी लेवल की भी जांच की जाएगी। इस दौरान उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले की घोर निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बैठक में केंद्रीय सचिव देवश्री मुखर्जी, दिल्ली के मुख्य सचिव धर्मेंद्र कुमार, हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत गर्ग, अतिरिक्त मुख्य सचिव सिंचाई विभाग अनुराग अग्रवाल समेत सिंचाई एवं पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।