-मृतक कर्मचारी की विधवा को पेंशन का पूरा लाभ ब्याज सहित अदा करने का यूएचबीवीएनएल को आदेश
-कहा-विभाग का अत्यधिक तकनीकी और कठोर रवैया न्याय और समानता के सिद्धांतों के विरुद्ध
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान लगी चोट से हुई दिव्यांगता को अक्षम्यता बताना कानून के खिलाफ और असंवेदनशील रवैया है। कोर्ट ने विभाग को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को उनके पति की सेवा से जुड़े सभी पेंशन लाभ और पारिवारिक पेंशन का लाभ तुरंत बहाल की जाए। साथ ही 2018 से अब तक रोकी गई राशि का भुगतान 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित किया जाए।
याची ने हाईकोर्ट को बताया कि याची के पति बिजली निगम में कार्यरत थे और 1983 में ड्यूटी के दौरान करंट लगने से गंभीर रूप से घायल हुए और 90 प्रतिशत दिव्यांग हो गए। उसी वर्ष उनकी सेवाएं यह कहते हुए समाप्त कर दी गईं कि वे अक्षम हो गए हैं। इसके साथ ही उन्हें कोई पेंशन भी नहीं दी गई। वर्षों बाद पत्नी ने इनवैलिड पेंशन की मांग की जिसके बाद 2014 में पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई लेकिन 2018 में विभाग ने अचानक यह लाभ बंद कर दिया। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि दिव्यांगता को अक्षम्यता मानना निंदनीय है। विभाग का यह दृष्टिकोण बेहद असंवेदनशील है। कोर्ट ने कहा कि 1997 की बाढ़ में शाहबाद स्थित दफ्तर के आधिकारिक रिकॉर्ड नष्ट हो चुके हैं तो लगभग 40 साल पुराने दस्तावेज विधवा से मांगना हास्यास्पद और अनुचित है। विभाग सेवा रिकाॅर्ड का एकमात्र संरक्षक है। यदि स्वयं दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पा रहा है तो विधवा से प्रमाण की अपेक्षा करना अन्यायपूर्ण है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार सक्षम प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश को उसका उसके आगे का अधिकारी मनमाने ढंग से रद्द या संशोधित नहीं कर सकता। केवल उन्हीं मामलों में ऐसा किया जा सकता है जब आदेश बिना अधिकार पारित हुआ हो, नियमों के खिलाफ हो या धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया हो।