चंडीगढ़। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए उपायुक्तों व कार्यालय प्रमुखों को मंडलायुक्तों से अनुमति लेनी होगी। मंडलायुक्त को 15 दिनों में ऐसे मामलों में स्वीकृति देनी होगी। इस बारे में मुख्य सचिव कार्यालय के सतर्कता विभाग की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि इस बारे में केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से पहले से ही आदेश जारी किए जा चुके हैं लेकिन कुछ दिशा-निर्देशों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। नए आदेशों में यह भी तय किया गया है कि किसी भी विभाग के ग्रुप बी, सी और डी से संबंधित राज्य कर्मचारियों के खिलाफ एक करोड़ तक के भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं तो उसकी जांच और एफआईआर दर्ज करने का अधिकार सतर्कता विभाग के आईजी, डीआईजी और एसपी स्तर के अधिकारियों के पास रहेगा। ब्यूरो