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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा में अगले महीने से मकान व जमीन खरीदना महंगा, एक अगस्त से लागू होंगे नए कलेक्टर रेट

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-नौ महीने में दूसरी बार बढ़ाने जा रही सरकार, पांच से 25 फीसदी तक बढ़ सकते हैं
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पिछले साल एक दिसंबर को डेढ़ साल बाद बढ़े थे रेट



अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में अगले महीने से जमीन और मकान खरीदना महंगा हो जाएगा। राज्य सरकार एक अगस्त से नए कलेक्टर रेट लागू करने जा रही है। इसके लिए सभी जिलों में उपायुक्तों को अनुमोदित फार्मूला भेज दिया गया है। इसके तहत अलग-अलग स्थानों के लिए कलेक्टर रेट में पांच से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है। इससे पहले एक दिसंबर 2024 को कलेक्टर रेट बढ़ाए गए थे, तब 12 से 32 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी।
हरियाणा सरकार पिछले कुछ दिनों से कलेक्टर रेट बढ़ाने की तैयारी में जुटी है। नए रेटों को सरकार की तरफ से मंजूरी भी दी चुकी है। अब उपायुक्तों व मंडल कमिश्नर को भेजे पत्र में सरकार ने कहा है कि कलेक्टर रेट को प्राथमिकता के आधार पर एक अगस्त से लागू करें। यह रेट इसी साल एक अप्रैल से बढ़ने थे, मगर सैनी सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी और प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। सरकार का तर्क था कि एक दिसंबर को ही रेट बढ़ाए गए हैं और चार महीने बाद फिर से रेट बढ़ने से गलत संदेश जा सकता है। इसके बाद सरकार ने अगले आदेश तक पुराने रेटों पर रजिस्ट्रियां करने के निर्देश दिए।
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प्रॉपर्टी के रेट नहीं बढ़ने से सरकार को राजस्व में काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है, इसलिए अब दरों में संशोधन करने का फैसला किया गया है।
जहां ज्यादा रजिस्ट्री, वहां ज्यादा रेट बढ़ेंगे
राजस्व विभाग के सूत्रों ने बताया कि कलेक्टर रेट बढ़ाने का एक फार्मूला है। इस फार्मूले को रजिस्ट्ररी के हिसाब से तय किया जाता है। जिन इलाकों में ज्यादा रजिस्ट्री होती हैं, वहां कलेक्टर रेट ज्यादा बढ़ाए जाते हैं। पिछली बार गुरुग्राम, सोहना, फरीदाबाद, पटौदी और बल्लभगढ़ के कलेक्टर रेट में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी।
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लोकसभा व विधानसभा चुनाव की वजह से नहीं बढ़े थे रेट
आमतौर पर अप्रैल में ही कलेक्टर रेट बढ़ते हैं, मगर न तो पिछले साल अप्रैल में रेट बढ़े और न ही इस साल। पिछले साल चुनाव होने की वजह से सरकार ने कलेक्टर दरों को संशोधित करने के फैसले को टाल दिया था। पहले लोकसभा चुनाव हुए और फिर विधानसभा चुनाव। नई सरकार ने अक्तूबर में कार्यभार संभाला और दो महीने बाद दिसंबर में कलेक्टर रेट बढ़ाने का फैसला किया।
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