निकाय संस्थाएं आपत्तियों को दूर करने के प्रति गंभीर नहीं
- जनवरी 2024 की तरह प्रदेश में लंबित मामले केवल 10 हजार तक लाने के आदेश
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। प्रदेश की निकाय संस्थाएं प्राॅपर्टी से जुड़ी आपत्तियों को दूर करने के प्रति गंभीर नहीं है। निकाय संस्थाओं में प्राॅपर्टी आईडी से जुड़ी आपत्तियां लगातार बढ़ रहीं हैं। विभागीय ब्योरे के अनुसार अप्रैल में निकाय स्तर पर लंबित आपत्तियों की संख्या 14,389 थी। 24 मई तक इनकी संख्या बढ़कर 15,320 हो गई। अब 1 जुलाई तक आपत्तियों के समाधान के बजाय लंबित मामले प्रदेश में बढ़कर 24,171 हो गए हैं।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव विकास गुप्ता वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से इसकी समीक्षा करेंगे। जनवरी 2024 तक राज्य में कुल लंबित आपत्तियां 10 हजार से कम थीं और भविष्य में भी प्रदेश में इससे अधिक लंबित आपत्तियां नहीं होनी चाहिए। इसके लिए मानेसर नगर निगम सहित सभी 22 जिलों के डीएमसी (डिस्टि्रक म्युनिसिपल कमिश्नर) को पत्र भेजा गया है। पत्र में ऐसी अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
कुछ जिलों में कारण बताओ नोटिस भी भेजने के आदेश दिए गए हैं और आपत्तियों के समाधान में विफल रहने वाले अधिकारियों के वेतन से कटाैती जैसे आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही डीएमसी और दूसरे अधिकारी अपने स्तर से साप्ताहिक समीक्षा बैठक करेंगे ताकि अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। वहीं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना हो या फिर प्राॅपर्टी से जुड़ी शिकायतें, सभी के समाधान के लिए नियमित समीक्षा की जा रही है ताकि लंबित आवेदनों का निपटान हो सके।
चेकर व मेकर स्तर पर लंबित मिली हैं आपत्तियां
निकायों में लंबित आपत्तियां चेकर (अधिकारी) और मेकर (क्लर्क/कर्मचारी) के स्तर पर मिली हैं। इन आपत्तियों में नाम, क्षेत्रफल, स्थान आदि की त्रुटियां हैं। वहीं झज्जर में लंबित आपत्तियों में 493 प्रतिशत, मानेसर में 258 प्रतिशत, अंबाला में 133 प्रतिशत, रोहतक में 299 प्रतिशत, सोनीपत में 88 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। जनता के स्तर पर लंबित आपत्तियों में कमी हुई है। 21 अप्रैल को जनता के स्तर पर 67,207 लंबित आपत्तियां थीं, जो कि एक जुलाई तक 35,839 रह गई हैं। जनता के स्तर की आपत्तियां वह हैं जिनमें सही दस्तावेज या पठनीय दस्तावेज नहीं दिए गए।
इन निकायों में घटीं शिकायतें
कुछ निकाय संस्थाओं ने बेहतर कार्य किया है। इनमें 21 अप्रैल 2025 की तुलना में लंबित शिकायतों का बोझ कम हुआ है। निकाय विभाग के ब्योरे के अनुसार नूंह में 37 प्रतिशत, कैथल में 13 प्रतिशत, कुरुक्षेत्र में 24 प्रतिशत, जींद में 25 प्रतिशत और भिवानी में 14 प्रतिशत शिकायतें कम हुई हैं।
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इन निकायों में है ज्यादा लंबित मामले
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के एक जुलाई 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक झज्जर में 3031, रोहतक में 4217, यमुनानगर में 1523, करनाल में 1280 और फरीदाबाद 4057 प्राॅपर्टी आईडी के मामले लंबित हैं। इसके अलावा गुरुग्राम में 1830, पानीपत में 1089, सोनीपत में 1153, हिसार में 1013 मामले लंबित चल रहे हैं।