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टावर ऑफ जस्टिस में स्थानांतरित करें गुरुग्राम जिला अदालत: हाईकोर्ट

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- सरकारी लापरवाही या प्रशासनिक चूक का खामियाजा न्यायपालिका और आम जनता क्यों भुगते
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- हाईकोर्ट ने जनहित में दिया तत्काल स्थानांतरण का आदेश


चंडीगढ़। गुरुग्राम जिला अदालत के कामकाज पर मंडरा रहे संकट के बीच पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने अब अदालतों को नए न्यायिक परिसर ''टावर ऑफ जस्टिस'' में तत्काल स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अधिकारियों की लापरवाही या प्रशासनिक चूक का खामियाजा न्यायपालिका और आम जनता को नहीं भुगतना चाहिए। न्यायिक कार्य किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होने चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जिला अदालतों को नए परिसर में स्थानांतरित करना जनहित में अपरिहार्य है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि शिफ्टिंग की प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाए और 21 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई तक अनुपालन का हलफनामा अदालत में दाखिल किया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि गुरुग्राम के पुराने जिला अदालत परिसर में आग लगने के बाद भवन का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था और उसे उपयोग के लिए अनुपयुक्त घोषित करना पड़ा। इसके बाद से अदालतों का संचालन अस्थायी रूप से एक गेस्ट हाउस से किया जा रहा है, जहां केवल अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई हो पा रही है।
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अदालत ने माना कि इस स्थिति से न्यायिक व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। इससे पहले हाईकोर्ट ने गुरुग्राम के जिला व सत्र न्यायाधीश से नए न्यायिक परिसर की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि भवन में कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा था, फर्नीचर पूरी तरह नहीं लगाया गया था और हाल की बारिश के दौरान बेसमेंट में सीवर का पानी भर गया था। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पर्यावरण मंजूरी और अग्निशमन विभाग की स्वीकृति भी लंबित थी।


सुनवाई के दौरान हरियाणा लोक निर्माण विभाग (भवन व सड़क) के अभियंता प्रमुख अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद बताई गई सभी कमियों को दूर कर दिया गया है और भवन अब पूरी तरह तैयार है। पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन किया जा चुका है तथा अग्निशमन विभाग का प्रमाणपत्र भी शीघ्र मिलने की संभावना है।
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खंडपीठ ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में सभी औपचारिक मंजूरियां मिलने तक इंतजार किया जा सकता था, लेकिन गुरुग्राम जिला अदालत की वर्तमान स्थिति असाधारण है। न्यायिक कार्य पहले से ही गंभीर रूप से प्रभावित हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य राज्य सरकार की एजेंसी ने कराया है। यदि किसी स्तर पर वैधानिक मंजूरियां समय पर लेने में चूक हुई है तो उसके कारण न्यायालय के कामकाज को संकट में नहीं डाला जा सकता। गुरुग्राम के नए न्यायिक परिसर ''टावर ऑफ जस्टिस'' का निर्माण अक्तूबर 2020 तक पूरा होना था, लेकिन परियोजना लगातार विलंब का शिकार होती रही। इसी देरी को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी।
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