- पांच साल में 22 बर्खास्त और 40 को कड़ी सजा मिली, भ्रष्टाचार के मामले में हरियाणा देश में सातवें स्थान पर पहुंचा
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। प्रदेश में पांच साल के अंदर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत 773 लोगों को गिरफ्तारी हुई हैं जिनमें से 70 फीसदी सरकारी अफसर और कर्मचारी है। वहीं पांच साल में औसतन सजा दर तकरीबन 32.53 फीसदी रही यानी 100 में 33 लोगों को सजा हुई है। भ्रष्टाचार के बढ़ते मामलों ने हरियाणा को देश में सातवें स्थान पर पहुंचा दिया है। राज्य में पांच वर्षों (जनवरी 2021 से अगस्त-2025 तक) भ्रष्टाचार के मामलों में 78.48 फीसदी वृद्धि हुई है। इनमें वर्ष 2023 तक राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट-2023 के आंकड़े हैं। वर्ष 2024 व 2025 में अगस्त तक के मामलों की संख्या राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की।
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो टीम ने साल 2023 में 226 आरोपियों को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था। इनमें 30 राजपत्रित अधिकारियों, 156 गैर राजपत्रित अधिकारियों और 40 निजी व्यक्तियों की गिरफ्तारी शामिल थी। इसी तरह साल 2024 में 117 गिरफ्तारियां की गईं थीं जिनमें 47 राजपत्रित अधिकारियों, 57 गैर राजपत्रित अधिकारियों के अलावा 29 निजी व्यक्ति शामिल थे। साल 2025 में 141 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे जिनमें 112 सरकारी अधिकारी शामिल थे। इनमें एक राजपत्रित व 111 गैर राजपत्रित अधिकारी व 29 निजी व्यक्ति शामिल थे।
पांच साल में 22 बर्खास्त और 40 को मिली कड़ी सजा
साल 2025 में 6 अधिकारी-कर्मचारी बर्खास्त किए गए। 11 को कड़ी सजा मिली। सजा की दर 37% रही। 2024 में 7 बर्खास्त किए गए। 10 को कड़ी सजा मिली। सजा की दर 33% रही। 2023 में
8 लोग बर्खास्त हुए, 8 को कड़ी सजा मिली और 23.1% सजा की दर रही। 2022 में 1 बर्खास्त, 8 को कड़ी सजा मिली। 36.4 % सजा की दर रही। साल 2021 में 3 को कड़ी सजा मिली। 33.3 % सजा की दर रही।
पांच वर्ष में भ्रष्टाचार के मामलों में 78.48 फीसदी वृद्धि
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार 2021 में भ्रष्टाचार के 79 मामले थे जबकि 2023 में यह संख्या 226 पहुंच गई। यह वृद्धि 186.08 फीसदी है। दो वर्षों में सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवीएंडएसीबी) की तरफ से शिकंजा कसा गया है। इसके बाद पांच वर्षों में भ्रष्टाचार के मामलों की वृद्धि दर 78.48 प्रतिशत पहुंच गई। रोहतक के महर्षि विश्वविद्यालय के कानून विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. कृष्णपाल सिंह महलवार के मुताबिक यह आंकड़ा इस ओर इशारा करता है कि या तो भ्रष्टाचार बढ़ा है या शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई करने की प्रवृत्ति में सुधार हुआ है। प्रदेश में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और लोकायुक्त संगठन सक्रिय हैं। राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भ्रष्टाचार गंभीर मसला है।
वर्ष दर वर्ष भ्रष्टाचार के मामले
साल - मामले
2021 - 79
2022- 246
2023- 226
2024- 117
2025- 105
(एनसीआरबी-एसवीएंडएसीबी की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार)
2025 में विभागवार भ्रष्टाचार के मामले (साल 2025 के आंकड़े फीसदी में)
पुलिस विभाग - 33
राजस्व विभाग - 17
स्वास्थ्य विभाग - 7
शहरी स्थानीय निकाय - 4
खाद्य एवं उपभोक्ता मामले विभाग - 4
बिजली विभाग - 4
आबकारी एवं कराधान विभाग - 4
परिवहन विभाग - 3
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण - 2
पंचायती राज -2
श्रम विभाग -2
खजाना-लेखा -2
शिक्षा विभाग 2
वन, खाद्य निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई और न्यायिक विभाग जैसे अन्य महकमों के आंकड़े कुल 14 फीसदी हैं।
भ्रष्टाचारियों के लिए विभाग में जगह नहीं : डीजीपी
नवनियुक्त पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल पद संभालते ही विभाग में भ्रष्टाचार पर सख्त बयान दे चुके हैं। डीजीपी ने कहा है कि विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है। इस पर यह सीधा नहीं कहा जा सकता है कि उन्हें बर्खास्त कर देंगे लेकिन कानूनी सलाह के आधार पर भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। भ्रष्टाचारियों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है।