15 सितंबर से गांवों तक अभियान, रैली, फ्लैश मॉब, रेड रिबन क्विज से जागरूकता
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एचआईवी नियंत्रण की दिशा में हरियाणा ने कुछ ही महीनों में बड़ी छलांग लगाई है। जनवरी में एचआईवी संक्रमित लोगों को उनकी बीमारी की जानकारी का आंकड़ा 85.2% था जो अब बढ़कर 93.2% हो गया है। इलाज तक पहुंच भी 83.7% से बढ़कर 90.9% हो गई है। वायरल सप्रेशन का आंकड़ा 95.8% पहुंच चुका है यानी हरियाणा इस मामले में 95 के लक्ष्य को पहले ही पार कर चुका है। कुरुक्षेत्र, कैथल, भिवानी, पंचकूला और यमुनानगर ने एचआईवी की पहचान, इलाज और वायरल सप्रेशन के प्रमुख लक्ष्यों में पूरा सुरक्षित दर्जा हासिल कर लिया है। इसके साथ हरियाणा देश के छह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार मरीजों की लगातार ट्रैकिंग, जांच का दायरा बढ़ाने और इलाज बीच में छोड़ने वालों को दोबारा जोड़ने से यह सुधार हुआ है। सरकार अब उन लोगों तक भी पहुंच बना रही है जिनके लिए सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान नहीं है। प्रवासियों, ट्रक चालकों, महिला सेक्स वर्करों, इंजेक्शन से नशा करने वालों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए विशेष आउटरीच अभियान चलाए जा रहे हैं। जेलों और ओएसटी (ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी) केंद्रों में भी जांच बढ़ाई गई है।
15 सितंबर से सभी जिलों में लोक कला के जरिए एचआईवी जागरूकता अभियान शुरू होगा। बाइकर रैली, वॉकथॉन, फ्लैश मॉब, रेड रिबन क्विज और रेड रन के जरिए युवाओं को जोड़ा जा रहा है। स्कूलों में कक्षा 8, 9 और 11 के विद्यार्थियों के लिए किशोर शिक्षा कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। हरियाणा का लक्ष्य 2030 तक नए एचआईवी संक्रमण, एड्स से होने वाली मौतों और भेदभाव को शून्य करना है।
ये है 95-95-95 लक्ष्य
यह एचआईवी नियंत्रण का एक वैश्विक लक्ष्य है। पहला 95 यानी एचआईवी के साथ जी रहे 95% लोगों को पता होना चाहिए कि वे संक्रमित हैं। दूसरा 95 यानी जिन लोगों को संक्रमण का पता है उनमें से 95% लोगों को लगातार एंटीरेट्रोवायरल इलाज मिलना चाहिए। तीसरा 95 यानी इलाज करवा रहे लोगों में से 95% में वायरस इतना कम हो जाए कि वायरल लोड दबा हुआ रहे।