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Chandigarh-Haryana News: खाद्य सुरक्षा अधिकारी के 45 में से 45 पद खाली, 1992 से नहीं हुई भर्ती

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वेटनरी डॉक्टरों से चलाया जा रहा है काम, सात सालों से जारी हैं नियुक्ति के प्रयास
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अब सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया
चंडीगढ़। हरियाणा में लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। राज्य में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (एफएसओ) के 45 पद हैं। इनमें से सभी पद खाली पड़े हैं। राज्य सरकार ने सैंपलिंग के लिए पशुपालन विभाग से नौ वेटरनेरी डॉक्टरों को प्रतिनियुक्ति पर लगा रखा है। हर वेटरनरी डॉक्टर के पास दो से तीन जिलों का प्रभार है। साथ में उन्हें वीआईपी दौरे के दौरान भी तैनात किया जाता है। 2018 से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भर्ती की सिर्फ कोशिशें जारी हैं।

प्रदेश में 1992 से एफएसओ की भर्ती नहीं हुई है। जो नियुक्त थे, वे सेवानिवृत्त होते चले गए। आखिरी पद पर नियुक्त एफएसओ भी पिछले साल सेवानिवृत्त हो गए। विभाग में सिर्फ ज्वाइंट कमिश्नर ही बचे हैं। एफएसओ नहीं होने का सीधा असर सैंपलिंग पर पड़ रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से जो लक्ष्य दिया जा रहा है, वह हरियाणा में पूरा नहीं हो पा रहा। सैंपलिंग का लक्ष्य पूरा नहीं होने का सीधा मतलब है कि असुरक्षित खाद्य पदार्थों पर लगाम नहीं कसी जा रही। राजस्थान, पंजाब, यूपी, दिल्ली से राज्य की सीमा जुड़ी होने की वजह से कई असुरक्षित खाद्य पदार्थों की आपूर्ति आसानी से हरियाणा में होती है। वेटरनरी डॉक्टरों को डेपुटेशन पर लेने से उनके विभाग का भी काम प्रभावित हो रहा है।
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सिर्फ 16 फीसदी ही लिए जा रहे सैंपल

हरियाणा में एफएसओ की कमी का खामियाजा सबसे ज्यादा असर खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग पर पड़ता है। जितनी ज्यादा जांच होगी उतने सुरक्षित खाद्य पदार्थ लोगों को मिलेंगे। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुताबिक एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी को हर महीने 10 लीगल सैंपल और 15 सर्विलांस सैंपल लेने जरूरी हैं। हरियाणा में 45 पद हैं। ऐसे में हर महीने 1125 सैंपल लिए जाने चाहिए। यानी 11 महीने में कम से कम 12,375 सैंपल लिए जाने चाहिए थे। लेकिन अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक 11 महीनों में 22 जिलों में करीब 16 फीसदी (2053) सैंपल ही लिए गए। इनमें से 286 सैंपल असुरक्षित और कम मानक के पाए गए।


सैंपलिंग के अलावा ये काम भी प्रभावित

1. खाद्य जागरूकता कार्यक्रम संचालित नहीं हो पाते
2. खाद्य सुरक्षा का लाइसेंस लेने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था है, मगर जो लोग ऑनलाइन आवेदन नहीं भर पाते उन्हें दिक्कत आती है
3. मोबाइल फूड वैन का संचालन नहीं हो पा रहा
4. नियमित अधिकारी नहीं होने से लोग शिकायत नहीं कर पाते।
5. ट्रेनिंग व जांच के काम भी प्रभावित होते हैं


नियमों में संशोधन व लापरवाही की वजह से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित
खाद्य सुरक्षा अधिकारी की भर्ती की प्रक्रिया 2018 से चल रही है। कभी आपत्ति तो कभी एफएसएसएआई के संशोधन की वजह से फाइल अटकती रही है। विभाग ने पहली बार 2018 में नियुक्ति की फाइल चलाई। चार साल बाद सरकार ने भर्ती प्रक्रिया की मंजूरी दी। 2022 में हरियाणा लोक सेवा आयोग ने एफएसओ के 41 पदों के लिए विज्ञापन निकाला, मगर तब एफएसओ के सेवा नियमों में आवश्यक योग्यताओं को लेकर स्पष्टता नहीं दी गई। इस पर एक अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। हाईकोर्ट ने भी सेवा नियमों में संशोधन की बात कही तो आयोग ने 2023 में भर्ती को वापस ले लिया। सेवा नियमों में संशोधन के बाद जब दोबारा फाइल चली तो एफएसएसएआई ने भर्ती योग्यता को लेकर संशोधन कर दिया। इसमें यूनानी, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, डेंटल डॉक्टर भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी बन सकेंगे। अब सरकार फिर से इस संशोधन को अमल में लाने में जुटी है।
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नियुक्ति में तेजी लाने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त

खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति का मुद्दा उठने के बाद हरियाणा सरकार ने सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। नियुक्ति प्रक्रिया की निगरानी के लिए ज्वाइंट कमिश्नर फूड को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। उनकी जिम्मेदारी है कि वह इस फाइल को तेजी से आगे बढ़ाते रहें और आपत्तियों को दूर करवाएं। जब से नोडल अधिकारी की नियुक्ति हुई है, तब से प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी है। जल्द सरकार से मंजूरी मिलने के बाद हरियाणा लोक सेवा आयोग भर्ती का विज्ञापन जारी कर सकता है।
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खाद्य सुरक्षा अधिकारी की भर्ती की प्रक्रिया चल में हैं। बहुत जल्द इन पदों की भर्ती शुरू की जाएगी।
आरती राव, स्वास्थ्य मंत्री
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