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Chandigarh-Haryana News: एचआरए बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे प्रदेशभर के ढाई लाख कर्मचारी

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सातवें वेतन आयोग की अवधि खत्म होने को आई, फिर भी नहीं मिला लाभ
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चंडीगढ़। प्रदेश के लगभग ढाई लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) में बढ़ोतरी का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सातवें वेतन आयोग की अवधि लगभग समाप्त होने वाली है। लेकिन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप एचआरए संशोधन अब तक लागू नहीं किया गया है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को मूल वेतन का 10 प्रतिशत, शहरी क्षेत्रों में 20 प्रतिशत और महानगरों में 30 प्रतिशत एचआरए मिलने का प्रावधान है जबकि महानगरों (गुरुग्राम, पंचकूला, फरीदाबाद व चंडीगढ़) के राज्य कर्मचारियों व अधिकारियों को 16 फीसदी और बाकी शहरों में आठ फीसदी एचआरए दिया जा रहा है। संशोधन के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को 20 फीसदी व 10 फीसदी एचआरए मिलना चाहिए।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता (डीए) 50 प्रतिशत होने के बाद एचआरए दरों में वृद्धि करते हुए इसे एक जनवरी 2024 से लागू कर दिया था। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारी पिछले करीब ढाई वर्षों से संशोधित एचआरए का लाभ उठा रहे हैं जबकि हरियाणा सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई ठोस फैसला नहीं लिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य सरकार की देरी के कारण उन्हें हर महीने आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, हरियाणा में डीए के अनुरूप एचआरए को संशोधित ही नहीं किया गया है। संशोधन के अनुसार महानगरों में 16 से 20 और बाकी शहरों में आठ से दस फीसदी मिलना चाहिए। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि सबसे अधिक नुकसान गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला जैसे महानगरों में कार्यरत कर्मचारियों को हो रहा है। कर्मचारियों के अनुसार इन शहरों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी 24 प्रतिशत एचआरए के पात्र बनते थे, लेकिन उन्हें भी केवल 16 प्रतिशत एचआरए ही मिल रहा है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला नहीं है। फिर भी इसका पता करवाएंगे और इसका हल निकालवाएंगे।
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एचआरए का नहीं मिलता एरियर

कर्मचारी संगठनों में इस बात की निराशा है कि एचआरए का एरियर भी नहीं मिलता है। साल 2024 से हर कर्मचारी को दो से पांच हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। जनवरी 2026 से आठवें वेतन आयोग के लागू होने की संभावनाओं के बीच कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सातवें वेतन आयोग से जुड़े लंबित लाभ पहले दिए जाएंगे। लेकिन अब तक कोई निर्णय न होने से कर्मचारियों में निराशा बढ़ गई है। कर्मचारियों की नाराजगी केवल सरकार तक सीमित नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों पर भी इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से न उठाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ढाई लाख से अधिक परिवारों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय को न विधानसभा में पर्याप्त मजबूती से उठाया गया और न ही सार्वजनिक स्तर पर प्रमुखता मिली।
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हरियाणा सरकार कहती है कि जो केंद्र सरकार कानून या नियम लागू करेगी, वह अपने राज्य में भी लागू करेगी मगर सरकार ने अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। इससे कर्मचारियों में काफी निराशा है।

- सुभाष लांबा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ
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