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Chandigarh-Haryana News: 22 मॉडल संस्कृति कॉलेज बनेंगे स्वायत्त संस्थान, पाठ्यक्रम-शिक्षण में मिलेगी अधिक स्वतंत्रता

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- उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और तकनीक आधारित शिक्षा पर जोर
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के 22 मॉडल संस्कृति महाविद्यालयों को स्वायत्त (ऑटोनॉमस) संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उच्चतर शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इस दिशा में चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था पर जोर दिया।

सरकार के अनुसार इन महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक प्रयोगशालाएं और तकनीक आधारित शिक्षण सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसका मकसद विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख और वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना है।
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स्वायत्त संस्थान ऐसे कॉलेज होते हैं जिन्हें शैक्षणिक और प्रशासनिक स्तर पर अधिक स्वतंत्रता प्राप्त होती है। वे विश्वविद्यालय से संबद्ध रहते हुए भी अपने पाठ्यक्रमों को अपडेट कर सकते हैं। नए कौशल आधारित कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं। परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में नवाचार कर सकते हैं तथा उद्योगों की जरूरतों के अनुसार शिक्षा को ढाल सकते हैं। हालांकि डिग्री संबंधित विश्वविद्यालय के नाम से ही दी जाती है।
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अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट पंजीकरण शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (अधिकतम 50 हजार रुपये) और 10 करोड़ रुपये के उच्च शिक्षा गुणवत्ता एवं अनुसंधान कोष की स्थापना की जाएगी। बैठक में राज्य के शिक्षण संस्थानों को एनआईआरएफ (राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क) की शीर्ष-150 रैंकिंग में शामिल करने, विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग बढ़ाने व शोध एवं पेटेंट संस्कृति को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। पंचकूला और गुरुग्राम में स्थापित किए जाने वाले ऑटोनॉमस एआई डिजिटल कॉलेजों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण प्रणाली लागू होगी।

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