करीब 20 वर्षीय मादा भालू नेहा ने रविवार की देर सायं तोड़ दिया। वह बुजुर्ग थी और लीवर की बीमारी से परेशान थी। सोमवार को डाक्टरों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया और जलाने के बाद दफनाया गया। चिडियाघर लगातार जानवरों से खाली होता जा रहा है। पिछले वर्ष एकमात्र टाइगर ब्रांडिस, एक पेंथर ने दम तोड़ा तो अब चिड़ियाघर में मौजूद एकमात्र भालू भी नहीं रही। मादा भालू नेहा ने रविवार देर सायं दम तोड़ दिया।
20 वर्षीय नेहा का जन्म भिवानी चिड़ियाघर के बाड़े में ही हुआ और वह यहीं रही। उसके लिए साथी भी लाया गया। मगर कुछ वर्ष उसके साथी की मौत हो गई। जिसके बाद वह अकेली थी। सोमवार को डा. जयपाल, डा. अशोक खासा, डा. तुलसीराम, डा. अश्विनी लांबा की टीम ने मादा भालू के शव का पोस्टमार्टम किया। डा. जयपाल ने बताया कि मादा भालू की उम्र ज्यादा हो गई थी। उम्र के कारण उसके लीवर ने काम करना बंद कर दिया था। इसी कारण उसकी मौत हुई। चिड़िया घर से निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मादा भालू नेहा की उम्र काफी हो गई थी। उसका जन्म भिवानी में ही हुआ था। बता दें कि भालू की औसतन उम्र 20 से 25 वर्ष होती है। जंगल में भालू की उम्र इससे भी कम हो जाती है।