देवसर में आयोजित बैठक में उपस्थित जिला पार्षद व प्रतिनिधि।
भिवानी। प्रदेश के सरपंचों की तर्ज पर अब जिला परिषद सदस्य भी मांगों के समर्थन में लामबंद होना शुरू हो गए हैं। जिला परिषद के सदस्यों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को तेज किया जाएगा। वक्ताओं ने प्रदेश सरकार को आरपार की लड़ाई शीघ्र शुरू करने का अल्टीमेटम भी दिया।
बुधवार को प्रदेश के 22 जिलों के करीब 200 जिला परिषद सदस्यों ने भिवानी के देवसर धाम में हुई प्रदेशस्तरीय बैठक में आंदोलन को लेकर रणनीति बनाई। जिला परिषद सदस्यों ने मानदेय और अधिकार बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश सरकार को चेताया। जिला परिषद सदस्यों ने सांसद व विधायकों की तर्ज पर शक्तियां दिए जाने की सरकार से मांग की। मोनू देवसर ने कहा कि शक्तियों के अभाव में सरपंचों के मार्फत काम करने को मजबूर हैं। उन्हें मात्र तीन हजार रुपये मानदेय मिलता है। शहरी क्षेत्र से चार से पांच हजार मतदाताओं पर बनने वाले पार्षदों को 7500 रुपये मानदेय मिलता है।
महंत दर्शन गिरि हिसार, चेयरमैन रविंद्र सांगवान दादरी ने कहा कि सरकार उनका मानदेय 50 हजार रुपये करें, विधायक व सांसद की तर्ज पर ऐच्छिक निधि तीन लाख रुपये निर्धारित की जाए। जिले के सभी टोल उनके लिए फ्री हो। पार्षदों को कार्यालय व कामकाज में सहायता के लिए कर्मचारी उपलब्ध हो। वार्ड के किसी भी कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला पार्षद से एनओसी लेना जरूरी किया जाए।
वहीं, कविता सोनीपत, जोगेंद्र पहलवान जींद, कर्ण पहलवान करनाल, रामफल करनाल ने कहा कि पार्षदों की पेंशन शुरू की जाए। पार्षदों को सीएचसी व पीएचसी के कार्योंं में निरीक्षण की शक्तियां प्राप्त हो। जिला पार्षद की प्रोटोकॉल की अधिसूचना जारी की जाए। 1500 किलोमीटर का पेट्रोल भत्ता दिया जाए। हर जिले का अपना बजट तथा सभी जिला पार्षदों का बजट बराबर हो। वक्ताओं ने कहा कि ये मांगें उनका हक है। इन्हें पूरा किया जाना प्रदेश सरकार का दायित्व है। अध्यक्षता भिवानी के वार्ड नंबर सात के जिला पार्षद प्रतिनिधि मोनू देवसर ने की।