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Bhiwani News: योगशाला बनी बदहाली की शिकार, तीन साल से नहीं हो रहा उपयोग

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खस्ताहाल गांव कैरू की योगशाला। 
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कैरू। स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई गांव कैरू की योगशाला पिछले तीन वर्षों से बदहाली का शिकार बनी हुई है। योगशाला में गंदगी, खरपतवार और अव्यवस्था के कारण ग्रामीण वहां जाने से कतराने लगे हैं। हालत यह है कि योग प्रेमियों ने योगशाला में जाने के बजाय घरों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर योगाभ्यास करना शुरू कर दिया है।
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ग्रामीणों के अनुसार सरकार की ओर से लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई योगशाला का रखरखाव नहीं होने से इसका फर्श उखड़ चुका है और परिसर में खरपतवार उग आई है। लोगों का आरोप है कि यहां असामाजिक तत्वों द्वारा शराब सेवन भी किया जाता है। गंदगी और अव्यवस्था के कारण यह स्थान योग के बजाय बीमारियों का केंद्र बनता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब व्यवस्था ही सवालों के घेरे में हो तो स्वस्थ और स्वच्छ दिनचर्या के लिए योग व प्राणायाम की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।
ग्रामीणों ने बताया कि योगशाला की अनदेखी के कारण लाखों रुपये की सार्वजनिक राशि व्यर्थ चली गई। न तो यहां ग्रामीण आते हैं और न ही इसकी देखरेख की जा रही है। लोगों ने प्रशासन और पंचायत से योगशाला की स्थिति सुधारने की मांग की है।
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कैरू को खंड का दर्जा प्राप्त है और यहां पर योगशाला की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन योगशाला में खरपतवार पैदा हो चुकी है और गंदगी फैलकर बीमारियों का अड्डा बन गया है। -संदीप लाला, देवराला।


योग करने के लिए स्कूल या धर्मशाला में जाना पड़ता है। योगशाला स्वस्थ जीवनशैली के लिए बनाई गई थी। लेकिन अब इसकी हालत खस्ताहाल हो चुकी है। -सुमेर भुक्कल, ग्रामीण।


पिछली पंचायत के कार्यकाल में बनी योगशाला की कोई देखरेख नहीं हो रही। लाखों रुपये की राशि व्यर्थ चली गई। ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। लोग अन्य सार्वजनिक स्थानों या अपने घरों में ही योग करने को मजबूर हैं। -कश्मीर, ग्रामीण।


मैं योगशाला में दो वर्ष पहले योग करवाने जाती थी। अब वहां की व्यवस्था दयनीय है। झाड़-झंखाड़ उगे हुए हैं। बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। टॉयलेट के दरवाजे भी नहीं हैं। सरपंच के कहने पर अब अस्पताल के हॉल में तो कभी आंगनबाड़ी केंद्र में योग करवाती हूं। -ममता, योग सहायक।


योगशाला की हालत दयनीय है। इसके निर्माण कार्य की मरम्मत के लिए पंचायती राज विभाग के जेई से एस्टीमेट बनवाकर भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही व्यवस्था में सुधार कराया जाएगा। -सुंदर पाल, सरपंच, कैरू।
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