भिवानी। सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि ऊपरी यमुना पुनरीक्षण समिति से जुड़ी सभी अंतरराज्यीय जल परियोजनाओं की प्रगति तेज करना बेहद जरूरी है। उन्होंने 1994 के जल-बंटवारा समझौते और यमुना जल प्रबंधन के तहत चल रही रेणुका, किशाऊ और लखवार जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की धीमी गति पर चिंता जताई। श्रुति चौधरी ने कहा कि इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना हरियाणा और दिल्ली की भविष्य की जल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनिवार्य है।
यह बात उन्होंने वीरवार को नोएडा सेक्टर 62 में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित ऊपरी यमुना पुनरीक्षण समिति की 9वीं बैठक में कही। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज, राजस्थान के सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत और दिल्ली के सिंचाई मंत्री प्रवेश साहिब सिंह भी मौजूद रहे।
श्रुति चौधरी ने कहा कि किशाऊ परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच विद्युत घटक की लागत साझेदारी को लेकर विवाद के कारण रुकी हुई है। उन्होंने इस मुद्दे के समाधान के लिए सभी संबंधित राज्यों की संयुक्त बैठक जल्द आयोजित करने का आग्रह किया ताकि परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके। मंत्री ने उम्मीद जताई कि समिति इन सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करके आवश्यक कदम जल्द उठाएगी। यमुना जल परियोजनाओं में तेजी आने से प्रदेश में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और पेयजल आपूर्ति से लेकर सिंचाई तक कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को लाभ होगा।