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Bhiwani News: नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता

Wed, 10 Jul 2024 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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आदर्श महिला महाविद्यालय में अपराजिता के तहत 3 नए कानून पर संवाद कार्यक्रम हुआ।
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भिवानी। आदर्श महिला महाविद्यालय में मंगलवार को आपराधिक कानून में हुए बदलाव से महिलाओं एवं बच्चों को होने वाले लाभ विषय पर अपराजिता के तहत संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संवाद कार्यक्रम में राजीव गांधी महिला महाविद्यालय में नोडल अधिकारी और कॉमर्स की प्राध्यापिका अनीता शर्मा मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंची। वहीं राजीव गांधी महिला महाविद्यालय में कॉमर्स की सहायक प्राध्यापिका ईशा चौधरी विशिष्ट अतिथि थी।
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संवाद कार्यक्रम में आदर्श महिला महाविद्यालय के करीब 10 प्राध्यापिकाओं ने भाग लिया। डॉ. गायत्री, डॉ. दीपू सैनी, डॉ. ममता सैनी, डॉ. अनीता वर्मा, डॉ. सुचेता सैनी, हिमांशी जैन, बबीता चौधरी और डॉ. रेनू नए आपराधिक कानूनाें पर चर्चा की। उन्होंने नए कानून पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता मिली है। यह प्रावधान महिलाओं के लिए भारत में एक अधिक सुरक्षित और समर्थनशील वातावरण बनाने का लक्ष्य रखते हैं, जिससे उन्हें न्याय प्राप्त करने और अपने अधिकारों का प्रभावी रूप से उपयोग करने में सहायता मिले। कानून इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को स्वीकार करते हैं, जिससे महिलाओं को साइबर छेड़छाड़, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल अपहरण के मामलों की रिपोर्टिंग और अदालती प्रक्रिया में सहायता प्राप्त करने में आसानी होती है।

इस दौरान मुख्य अतिथि अनीता शर्मा ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे तीन नए कानूनों में कई प्रावधान है। जो महिलाओं को लाभ पहुंचाते है। ये कानून बलात्कार, यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ जैसे अपराधों के लिए कठोर दंड लाते हैं। महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाव और समर्थन सेवाओं के लिए मजबूत प्रावधान प्रदान करते हैं।
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नया कानून महिलाओं के लिए अपराध की रिपोर्टिंग और न्याय प्राप्ति की प्रक्रियाओं को सरल बनाते हैं, जिससे कठिन कानूनी प्रक्रियाओं का बोझ कम होता है। इस कानून के आ जाने से किसी के साथ भी अन्याय नहीं होगा। नए आपराधिक कानूनों ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच को प्राथमिकता दी गई है। इसके अतिरिक्त जीरो एफआईआर जैसे सुविधाओं से जांच की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
- ईशा चौधरी, सहायक अध्यापिका, राजीव गांधी महिला महाविद्यालय




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नए कानून के द्वारा रेप पीड़ित महिलाओं को जो सुविधाएं दी गई है वह बिल्कुल सटीक है। रेप मामले की सुनवाई महिला जस्टिस द्वारा ही किया जाएगा। अगर कोई पुरुष जस्टिस इसकी सुनवाई कर रहा है तो उस दौरान महिला पुलिसकर्मी मौजूद होंगी। इसके अलावा 90 दिन के भीतर ही मामलों की सुनवाई की जाएगी। महिलाएं 15 वर्ष से कम आयु वाले बच्चे और 60 वर्ष से अधिक आयु वाले बुजुर्गों को थाने जाने से छूट मिली है।
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- अनीता शर्मा, नोडल अधिकारी, राजीव गांधी महिला महाविद्यालय
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