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टीबी पीड़िता ने नलबंदी के बाद दिया बच्चे को जन्म, जांच के लिए टीम गठित

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सामान्य अस्पताल में एक बार फिर बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। महिला गर्भवती थी, इसके बावजूद उसका नलीबंदी का ऑपरेशन कर दिया गया। महिला जब 20 सप्ताह की गर्भवती हुई तो इसका पता लगा। अब महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया है। मामला सामने आने के बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। महिला टीबी की बीमारी से पीड़ित है। महिला के पिता ने डीसी कार्यालय में शिकायत कर लापरवाही बरतने वाले स्टाफ सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही कहा कि उसकी बेटी बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ है। शिकायत के आधार पर सिविल सर्जन ने जांच कमेटी का गठन किया है।
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मामला मार्च 2018 का है। कैथल जिले की अपनी ससुराल से एक महिला भिवानी में अपने मायके भिवानी आई हुई थी। उसका टीबी बीमारी का इलाज कैथल में चल रहा था। बीमारी के कारण उसने नलीबंदी कराने का निर्णय लिया। इसके लिए 20 मार्च 2018 को भिवानी अस्पताल पहुंची। महिला के पिता ने बताया कि अस्पताल की लैब में यूरिन सहित अन्य टेस्ट कराए गए। यूरिन टेस्ट की रिपोर्ट भी निगेटिव बताई गई थी। इसके आधार पर 26 मार्च को नलीबंदी का ऑपरेशन कर दिया गया। इसके बाद सभी निश्चिंत थे कि अब बेटी अच्छे से टीबी का इलाज करा सकेगी। पेट में तकलीफ होने पर उसकी बेटी ने 10 जुलाई 2018 को कुरुक्षेत्र के एक सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराया तो वहां डॉक्टर ने बताया कि उसकी बेटी 20 सप्ताह की गर्भवती है। यह जानकारी सब हैरान रह गए कि एक तो टीबी की परेशानी और नलीबंदी कराने के बाद भी उसकी बेटी गर्भवती है, वह भी 20 सप्ताह की। मतलब नलबंदी के दौरान भी वह गर्भवती थी। गर्भवती होते हुए भी उसकी बेटी का नलीबंदी का ऑपरेशन किया गया। इससे उसकी बेटी की जान को भी खतरा था। 20 सप्ताह की गर्भवती होने के कारण अन्य विकल्पों पर भी विचार नहीं किया जा सकता था। इसके बाद वे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास गए, मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उसकी बेटी ने 30 अक्तूबर 2018 को सामान्य अस्पताल भिवानी में ही लड़के को जन्म दिया। महिला के पिता का कहना है कि अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण उसकी बेटी की जिंदगी से खिलवाड़ हुआ। ऐसे में लापरवाह अस्पताल स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि वे किसी अन्य की जिंदगी से खिलवाड़ न करें।
टीबी के कारण कैथल में डॉक्टर ने दी थी बच्चे और नहीं करने की सलाह
महिला के पिता जगदीश ने बताया कि उसकी बेटी का कैथल में टीबी का इलाज चल रहा था। वहां चिकित्सक ने सलाह दी थी कि लड़की शारीरिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में और बच्चा पैदा न करे। उसकी बेटी को पहले से ही एक लड़का और एक लड़की थी। उक्त चिकित्सक की सलाह पर ही उन्होंने नलीबंदी का ऑपरेशन कराने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद अस्पताल स्टाफ ने उसकी बेटी की जिंदगी से खिलवाड़ किया।
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बेटी को टीबी, दामाद अशक्त, कैसे होगा बच्चों का पालन
महिला के पिता ने बताया कि उसकी बेटी को टीबी की बीमारी है। उसके दामाद का एक सड़क हादसे में पांव कट गया है। जिस कारण वह भी कोई कार्य करने में असमर्थ है। ऐसे में उसकी बेटी के परिवार के सामने तीन बच्चों का पालन करने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
डीसी कार्यालय से महिला के गर्भवाती होते हुए भी नलीबंदी करने की शिकायत आई है। इसकी जांच की जा रही है। जांच के लिए कमेटी बनाई हुई है। कमेटी की रिपोर्ट में जिसकी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
स्वास्थ्य विभाग।
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