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Bhiwani News: सही देखभाल व सहयोग से डाउन सिंड्रोम बच्चे भी जी सकते हैं खुशहाल जीवन

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डाउन सिंड्रोम के लक्षणों से ग्रस्त बच्चा। चिकित्सक
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भिवानी। डाउन सिंड्रोम के लक्षणों से प्रभावित बच्चे भी सही देखभाल और सहयोग मिलने पर खुशहाल व सार्थक जीवन जी सकते हैं। इसके लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने, भेदभाव कम करने और सभी बच्चों को समान अवसर देने की आवश्यकता है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स सेंट्रल शाखा और स्थानीय शाखा समय-समय पर ऐसे बच्चों के लिए जागरूकता अभियान चला रही हैं।
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आईएपी शाखा भिवानी व चरखी दादरी के अध्यक्ष डॉ. महावीर लाकड़ा, सचिव डॉ. आयुष अग्रवाल व कोषाध्यक्ष डॉ. राज मेहता ने बताया कि डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चे भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्हें भी सम्मान, प्यार और दुलार की आवश्यकता होती है। यदि उन्हें अवसर मिले तो वे अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। ऐसे बच्चों के लिए परिवार का लगाव, समाज का अपनापन और समावेशी शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के भिवानी सचिव एवं पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आयुष अग्रवाल ने बताया कि डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में थोड़ा धीमा सीखते हैं लेकिन समय पर सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिलने पर वे चलना, बोलना और पढ़ना-लिखना सीख सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों का स्वभाव सामान्यतः मिलनसार होता है जिससे वे परिवार और समाज में आसानी से घुल-मिल जाते हैं।
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डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इन बच्चों में हृदय रोग, थायरॉयड, सुनने-देखने और चलने से संबंधित समस्याओं का खतरा अधिक रहता है इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और देखभाल बेहद जरूरी है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी जैसे शुरुआती हस्तक्षेप, विशेष रूप से जीवन के पहले छह वर्षों में बच्चों के विकास को काफी बेहतर बना सकते हैं।

क्या है डाउन सिंड्रोम
डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक स्थिति है जिसमें बच्चे के शरीर में एक अतिरिक्त गुणसूत्र होता है। ऐसे बच्चे सामान्य 46 गुणसूत्रों के बजाय गुणसूत्र 21 की अतिरिक्त प्रति के साथ जन्म लेते हैं। इससे उनके मानसिक और शारीरिक विकास में देरी होती है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन शुरुआती पहचान और उचित सहयोग से इसके प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
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ये हैं प्रारंभिक लक्षण व संकेत
बच्चे के जन्म के समय शरीर में ढीलापन
नवजात में दूध पीने में परेशानी
चेहरा थोड़ा चपटा और आंखें ऊपर की ओर तिरछी
छोटे कान व छोटी गर्दन
हथेली पर एक गहरी रेखा
शारीरिक विकास में देरी
देरी से बैठना, चलना और बोलना शुरू करना
उभरी हुई जीभ

इस तरह कर सकते हैं सुधार
प्रारंभिक हस्तक्षेप के लिए फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी
नियमित स्वास्थ्य जांच
समावेशी शिक्षा और सामाजिक सहयोग
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