भिवानी। अब साइबर ठगी करने वाले पुलिस के रडार पर तुरंत आ जाएंगे। विभाग को मिले प्रतिबिंब सॉफ्टवेयर से साइबर ठग की नजदीकी पुलिस थाने में तुरंत लोकेशन दिख जाएगी। इसके बाद पुलिस उसे तुरंत काबू कर पाएगी। भिवानी पुलिस ने भी साइबर ठग गिरोह से बरामद हुए मोबाइल से देशभर में 752 संदिग्ध संपर्कों की पहचान की है, जिससे करीब दो करोड़ की ठगी का अंदेशा है।
साइबर ठगी के लगातार बढ़ रहे मामलों पर निगरानी रखने के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर नई दिल्ली में बनाया गया है। अब तक साइबर ठगी के मामले इस सेंटर के माध्यम से सुलझाए जाते रहे हैं, लेकिन अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबिंब सॉफ्टवेयर विकसित किया है। ये सॉफ्टवेयर तब भी काम करेगा जब किसी व्यक्ति के साथ कोई साइबर ठगी करता है। ठगी की तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करा दी जाती है। 1930 पर शिकायत दर्ज होते ही जिस मोबाइल नंबर या लिंक से साइबर ठगी की गई है उसकी लोकेशन तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में दिखाई देगी। जिससे पुलिस उस साइबर ठग को तत्काल काबू कर पाएगी। वर्ष 2022 में प्रदेश भर में साढ़े 2700 धोखाधड़ी के मामले साइबर क्राइम पुलिस थानों में दर्ज हुए हैं। इनमें सबसे अधिक साइबर सिटी गुरुग्राम में साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं जबकि सबसे कम मामले चरखी दादरी जिले में दर्ज हुए हैं।
31 राज्यों के 752 संदिग्ध लिंक से करीब दो करोड़ की ठगी का अंदेशा
भिवानी साइबर क्राइम पुलिस थाने के एसएचओ विकास कुमार ने बताया कि आठ साइबर ठगों से 16 मोबाइल फोन बरामद हुए थे। जिसमें 31 राज्यों के 752 संदिग्ध संपर्क मिले हैं, जिनसे करीब दो करोड़ रुपये की ठगी का अंदेशा है। हालांकि भिवानी पुलिस बुजुर्ग की न्यूड वीडियो बनाकर ठगी के मामले में आरोपी से 27 लाख रुपये बरामद कर चुकी है। लेकिन देश के अन्य मामलों में अब संबंधित शिकायत दर्ज हैं या नहीं यह भी पुख्ता नहीं है। अगर कहीं ठगी की शिकायत दर्ज है तो उसमें आरोपियों को पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर लेकर बरामदगी की जाएगी।
ये है ठगी का पैसा वापस लेने की प्रक्रिया
पुलिस द्वारा जब किसी भी साइबर ठग से रुपये की रिकवरी की जाती है तो उसे वापस लेने के लिए अदालत से सुपरदारी करानी पड़ती है। जिसके लिए अधिवक्ता की आवश्यकता होती है, अगर पीड़ित वकील नहीं कर सकता है तो पुलिस उसे लीगल एड से अधिवक्ता दिलाती है। जिसके बाद एक निर्धारित आवेदन के साथ पैसे की दावेदारी अदालत में की जाती है। इस पर अदालत पुलिस से इसकी रिपोर्ट मांगती है। जिसके बाद अदालत इस पैसे को संबंधित के खाते में जारी करने के आदेश करती है।
2023 में साइबर पुलिस थानों में दर्ज मामले
थाना - आईटी एक्ट- नॉन आईटी एक्ट
अंबाला- 16- 82
भिवानी- 02- 83
चरखी दादरी- 00- 23
फरीदाबाद- 32- 203
फतेहाबाद- 21- 23
गुरुग्राम- 307- 347
हांसी- 02- 30
हिसार- 07- 46
झज्जर- 06- 62
जींद- 00- 38
कैथल- 03- 44
करनाल- 28- 282
कुरुक्षेत्र- 13- 34
महेंद्रगढ़- 09- 64
मेवात- 11- 89
पलवल- 11- 23
पंचकूला- 09- 84
पानीपत- 00- 80
रेवाड़ी- 02- 77
रोहतक- 02- 361
सिरसा- 02- 34
डबवाली- 02- 03
सोनीपत- 02- 138
यमुनानगर- 03- 67
जीआरपी- 00- 01
पुलिस थाना साइबर नोडल- 15- 24
कुल- 505- 2242
साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए प्रतिबिंब सॉफ्टवेयर कारगर साबित हो रहा है। साइबर ठगी के दौरान कोई भी शिकायत टोल फ्री नंबर 1930 पर दर्ज होती है तो साइबर ठग की तुरंत लोकेशन ट्रेस हो जाती है। इससे साइबर ठगों पर तुरंत शिकंजा कसा जा सकेगा। भिवानी पुलिस साइबर ठगी के मामलों में तत्परता से कार्रवाई कर ठगा हुआ पैसा लोगों को वापस दिलाने की हर संभव कोशिश में लगी है।
-वरुण सिंगला, पुलिस अधीक्षक भिवानी।