हूं में नमी किसानों के लिए आफत बन गई है। गेहूं में 13 से 14 प्रतिशत तक नमी है तो एक क्विंटल पर एक किलो की मार किसानों पर पड़ रही है। नमी यदि 16 से 18 प्रतिशत है तो दो से तीन किलो गेहूं की चपत किसानों को लग रही है। हालांकि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी ने इस तरह की चपत से इनकार करते हुए कहा कि उनके सामने नमी की जांच होती है। 12 प्रतिशत से ज्यादा नमी है तो खरीद नहीं होती। नमी के फेर में अनाज मंडी में रविवार को गेहूं की खरीद ही नहीं हुई।
अनाज मंडी में किसानों का पीला सोना यानी गेहूं की आवक शुरू हो गई है। मंडी परिसर में जगह-जगह गेहूं की ढ़ेरियां ही नजर आ रही है। किसान उचित दाम पाने के लिए गेहूं की फसल खुशी-खुशी मंडी में ला रहा है लेकिन यहां कुछ दलालों के फेर में कटौती की मार लग रही है। दो-तीन दिन पूर्व हुई बरसात के कारण गेहूं के दानों में नमी है। मंडी पहुंच चुके गेहूं में भी नमी सामने आ रही है। नमी के साथ ही दलालों का खेल शुरू हो गया है। सरकार के निर्देशानुसार 12 प्रतिशत तक नमी वाले गेहूं की ही खरीद होगी जबकि मंडी में आ रहे गेहूं में 14 से 18 प्रतिशत तक नमी है। इसका फायदा दलाल उठा रहे हैं।
कुछ किसानों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि गेहूं में नमी यदि 13-14 प्रतिशत है तो क्विंटल में एक किलो की कटौती होगी। इसी तरह नमी की प्रतिशतता बढ़ने के साथ ही गेहूं की कटौती भी बढ़ रही है। लोहानी से किसान रत्न सिंह, किसान चरण ने बताया कि नमी बड़ी समस्या बन गई है और हर ढेरी में नमी बताई जा रही है। इस कारण कटौती का खेल भी चल रहा है।
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अब तक एक ही दिन हुई खरीद
रविवार को नमी के चलते गेहूं की खरीद नहीं हुई। अब तक सिर्फ एक ही दिन शनिवार को गेहूं की खरीद हुई है। शनिवार को करीब 93 सौ क्विंटल गेहूं की खरीद की गई थी। रविवार को यह खरीदा गया गेहूं कट्टों में डालने का काम चलता रहा।
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गेहूं की आवक भी कम
पिछले दिनों हुई बरसात के चलते अनाजमंडी में गेहूं की आवक भी बहुत कम है। गेहूं की आवक कम होने के चलते खरीद भी प्रभावित हो रही है। आढ़तियों, अधिकारियों को उम्मीद है कि आगामी 10-12 दिन में खासी मात्रा में गेहूं पहुंचेगा।
गेहूं की खरीद शुरू हो गई है। शनिवार को करीब 93 सौ क्विंटल गेहूं की खरीद की गई। रविवार को नमी के चलते गेहूं की खरीद नहीं हो पाई। नमी के फेर में किसानों को चपत लगाने की बातें सिर्फ अफवाह है। वह स्वयं नमी की जांच करवाते हैं।
संजय कुमार, इंस्पेक्टर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग
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बहल में गेहूं नहीं पहुंचा, सरसों बिकी मंडी से बाहर
बहल। प्रदेश सरकार ने बेशक गेेहूं और सरसों के लिए सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरू की हो लेकिन स्थानीय अनाज मंडी अभी सुनसान है। मंडी में न तो किसान अपनी उपज लेकर पहुंचे हैं और न ही आढ़ती। हालांकि, मंडी प्रशासन की तरफ से खरीद के लिए जरूरी इंतजाम किए जाने के दावे किए जा रहे हैं।
सरसों की सरकारी खरीद होने, न होने को लेकर चली कशमकश का यह परिणाम रहा कि सरसों अनाज मंडी में न आकर सीधे व्यापारियों के हाथ जा पहुंची। बेशक व्यापारियों के पास किसानों को भाव कम मिले हो लेकिन पैसे की जरूरत के कारण सरसों की फसल को बेचा जाना उनकी मजबूरी बन गई थी। वहीं, इस सीधी खरीद फरोख्त में मार्केट फीस का भी नुकसान होने का अंदेशा है। जानकारों का मानना है कि मंडी प्रशासन की ओर से सरसों की जो आमदनी दर्ज की गई है, असल में उससे कहीं ज्यादा सरसों बाजार में बिक्री हो चुकी है। वहीं, गेहूं की आवक अभी शुरू नहीं हो पाई है।
बहल मार्केट कमेटी के सचिव विजय सिंह का कहना है कि बहल क्षेत्र में गेहूं कटाई का काम देरी से शुरू होने तथा बारिश के कारण कटाई में बाधा आने से अभी अनाज मंडी में गेहूं नहीं आ रहा है। उमीद है कि 10 अप्रैल के बाद ही गेहूं की आवक होगी। वैसे मंडी प्रशासन की व्यवस्था पूरी है तथा सरकारी एजेंसी खरीद के लिए तैयार है।
पहली बार मिलेगा किसानों को टीन शेड का फायदा
सीएम घोषणा के अनुसार अनाज मंडी में एक कच्चे शेड को कवर करते हुए टीन शेड बनाया गया है। पहली बार किसानों तथा आढ़तियों को शेड के नीचे फसल रखने का फायदा मिल सकेगा। इससे पहले जब भी गेहूं की खरीद होती थी और मौसम खराब होता था तो किसानों और आढ़तियों के समक्ष परेशानी खड़ी हो जाती थी अब इससे निजात मिलेगी।
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