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Bhiwani News: जलभराव में डूब गई मेहनत, धान के साथ सड़ने लगे किसानों के सपने

Mon, 17 Nov 2025 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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गांव मुंढाल के खेतों में जलभराव के कारण खेतों में बिछी धान की फसल
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भिवानी। जुलाई माह में मानसून की अतिवृष्टि से हुए जलभराव का असर अब तक खत्म नहीं हुआ है। हालत यह है कि खेतों में भरा पानी पककर तैयार खड़ी धान की फसल को गिरा रहा है जिससे किसानों की महीनों की मेहनत खेतों में ही सड़ने लगी है।
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पानी में पड़ी बालियों का अनाज खराब हो रहा है जिसके चलते किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जलभराव के कारण खरीफ की फसल चौपट हो चुकी है और अब रबी फसल की बिजाई भी संभव नहीं हो पा रही है।दरअसल भारी बारिश के दौरान खेतों में जमा हुए पानी ने किसानों की दिनचर्या को चार माह से अस्त-व्यस्त कर रखा है। जिले की लगभग ढाई हजार एकड़ खेती योग्य भूमि पर अब भी जलभराव है। पक चुकी धान की फसल वजन के कारण पानी में बिछने लगी है जिससे अनाज सड़ रहा है और किसान की मेहनत बेकार हो रही है।
रोपाई से लेकर फसल पकने तक की गई सारी लागत पानी में डूबती दिख रही है। किसानों की मायूसी इस बात से भी बढ़ गई है कि इस बार धान का उपयुक्त रेट नहीं मिला जिसके कारण उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचनी पड़ रही है।
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प्रति एकड़ आया 20 हजार रुपये खर्च
धान की एक एकड़ फसल पर रोपाई से लेकर कटाई तक करीब 20 हजार रुपये खर्च होते हैं। रोपाई में चार से पांच हजार रुपये इसके बाद उर्वरक, सिंचाई के लिए डीजल, महंगे कीटनाशक, मजदूरी, कटाई और जुताई जैसे सभी खर्च जोड़कर यह लागत करीब 20 हजार रुपये तक पहुंचती है। किसान यह पूरा खर्च कर चुके हैं लेकिन समय पर खेतों से पानी की निकासी न होने से उनकी मेहनत और पूंजी दोनों डूबने लगी हैं।

बवानीखेड़ा और मुंढाल क्षेत्र में अब भी जलभराव
बवानीखेड़ा और मुंढाल क्षेत्र के लगभग ढाई हजार एकड़ क्षेत्र में अब भी पानी खड़ा हुआ है। पानी की निकासी न होने से रबी सीजन की बिजाई पूरी तरह प्रभावित है। खेती पर निर्भर किसान घर-परिवार और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी इसी आय से पूरा करते हैं। ऐसे में फसल खराब होने के बाद उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है और उनके पास नुकसान सहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

डेढ़ माह बाद भी नहीं मिला मुआवजा
सरकार ने सितंबर माह में क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलकर जलभराव से हुए नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया था। किसान 25 सितंबर तक अपना नुकसान दर्ज करा चुके थे और सरकार ने दीपावली तक मुआवजा देने की घोषणा की थी। लेकिन अब तक किसानों को एक रुपये की भी सहायता नहीं मिली है जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।



इस बार अधिक बारिश से खेतों में जलभराव हो गया जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार किसानों के साथ खड़ी है। पानी निकासी और मुआवजा वितरण को लेकर मैंने मुख्यमंत्री से मुलाकात की है। किसानों को किसी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। - कपूर सिंह वाल्मीकि, विधायक, बवानीखेड़ा।
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