भिवानी। पुराने जलघर के वाटर टैंकों में मृत बतखों को बाहर तो निकाल दिया, लेकिन बिना जांच किए ही उन्हें जमीन में दबा दिया गया। विभागीय अधिकारियों ने उनके मरने की वजह जानना भी जरूरी नहीं समझा। अब मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया तो जनस्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मचा है और अधिकारी जांच कराए जाने की बात कह रहे हैं।
बर्ड फ्लू की आशंका से घिरी बतखों की मौत के बाद दीवार के उस पार चिड़ियाघर के वन्य जीवों और पिंजरों में बंद परिंदों पर भी खतरा मंडराने लगा है। हालांकि वन्य प्राणी विभाग के संज्ञान में भी मामला लाया गया है। जिसके बाद सतर्कता बढ़ाई गई है। जलघर टैंकों में बतखें मरने का सिलसिला जारी है। टैंकों के आसपास लावारिस कुत्ते भी मंडरा रहे हैं, बतखें खाने की वजह से उनके संक्रमित होने का अंदेशा बना हुआ है।
महम रोड स्थित पुराने जलघर के टैंक नंबर सात में बतखें मरी हुई हैं। टैंक के अंदर काफी जंगली बेल व काई जमा हो गई है। जिसके बीच मरीं हुई बतखें भी पानी के ऊपर ही दिखाई दे रहीं है। इस टैंक में कुछ बतखों को कर्मचारियों ने बाहर निकाल कर जमीन में दबा दिया, लेकिन इसके बावजूद अभी भी काफी मृत बतखें पानी में ही हैं। दरअसल शहर का पुराना जलघर से ही सरकुलर रोड दायरे के अंदर आने वाले बूस्टरों तक पानी की आपूर्ति दी जा रही हैं, जिसके बाद इसी पानी को शहरी आबादी को सप्लाई में दिया जा रहा है। बर्ड फ्लू को लेकर एक्सपर्ट भी संभावनाओं से इंकार नहीं कर रहे हैं, मगर ये तो तभी साबित होगा जब मृत बतखों की जांच कराई जाएगी। लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही यहां भी उजागर हो गई हैं, क्योंकि मृत बतखों को टैंक से बाहर तो निकाल दिया, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में जमीन में दबा दिया। जिनकी किसी ने जांच कराने की जरूरत भी नहीं समझी। अगर इन बतखों की किसी गंभीर संक्रमण की वजह से मौत हुई है तो चिड़ियाघर के अंदर मौजूद वन्य जीव जंतुओं तक भी खतरा बढ़ जाएगा।
कोरोना की वजह से बंद पड़ा है चिड़ियाघर
कोरोना संक्रमण की वजह से मार्च 2020 से ही भिवानी का चिड़ियाघर (मिनी जू) बंद पड़ा है। चिड़ियाघर में जीव जंतुओं का रखरखाव करने और उन्हें खाना मुहैया कराने वाले कर्मचारियों के प्रवेश की ही अनुमति है। इसके अलावा कोई भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित किया हुआ है। चिड़ियाघर में जंगली मांसाहारी जीवों के अलावा शाकाहारी वन्य जीव भी हैं। चिड़ियाघर में जलचर जीवों के साथ साथ परिंदों की भी कई दुर्लभ प्रजाति यहां संरक्षित हैं। चिड़ियाघर और मुख्य पुराने जलघर टैंकों के बीच केवल एक दीवार का ही फासला है। करीब सात एकड़ में चिड़ियाघर फैला है।
वर्जन:::
जलघर के टैंकों की कुछ अर्से पहले ही सफाई कराई गई है। फिलहाल इनके अंदर पानी भी कम ही है। बतखें किस वजह से मरीं हैं, इसकी भी जांच कराएंगे। ये समस्या सिर्फ एक ही टैंक में हैं, जबकि अन्य टैंकों में कोई भी बतख मृत नहीं है।
- प्रवीण जांगड़ा, एसडीओ शहरी पेयजल शाखा।
मैंने कर्मचारियों को भेजकर टैंक से मृत बतखें निकालने के निर्देश दिए थे, उन कर्मचारियों ने बतख जमीन में दबा दी। हमने मृत बतखों की जांच के संबंध में उच्चाधिकारियों से भी बात की है। जैसे निर्देश मिलेंगे उसी हिसाब से कदम उठाए जाएंगे।
- सचिन, कनिष्ठ अभियंता, इंचार्ज पुराना जलघर भिवानी।
बर्ड फ्लू के आशंकित मामलों के अब तक भेजे गए सभी सैंपल निगेटिव आए हैं। चिड़ियाघर के पास जलघर के टैंकों में मृत बतखों की भी जांच कराई जाएगी। चिड़ियाघर फिलहाल कोरोना संक्रमण की वजह से बंद हैं, अभी दर्शकों के लिए खोलने के भी कोई आदेश नहीं है।
- जयभगवान शर्मा, निरीक्षक वन्य प्राणी विभाग एवं इंचार्ज चिड़ियाघर भिवानी।