पुराने शहर में लाइन लीकेज से हो रही दूषित पानी की आपूर्ति की समस्या का समाधान ढूंढने के लिए पब्लिक हेल्थ विभाग ने एक बार फिर जगह-जगह गड्ढ़े खोद डाले। 15 कर्मचारियों ने 25 से अधिक गड्ढ़े खोदे मगर लीकेज और मिक्सिंग की समस्या का समाधान नहीं कर पाए।
वहीं दूषित पेयजल आपूर्ति व लीकेज ढूंढने के लिए खोदे गए गड्ढों से करीब दर्जन भर कॉलोनियों में भी पानी आपूर्ति का शेडयूल बिगड़ गया है। कहीं सप्लाई में पानी नहीं आ रहा है तो कहीं दूषित पानी आ रहा है, जो पीने तो दूर किसी कार्य में प्रयोग करने लायक नहीं है। महम चौक पर लाइन लीकेज की वजह से पिछले एक सप्ताह में तीसरी बार गड्ढ़ा खोदा गया है, मगर अभी तक लीकेज नहीं मिली है। अब इस लाइन की और गहराई तक खुदाई कराई जाएगी। जाम की समस्या से बचने के लिए रूट डायवर्ट किया जाएगा।
पुराने शहर में अधिकांश अधिकांश पेयजल लाइनें जर्जर हाल हो चुकी हैं। इसी वजह से सर्दियों के मौसम में पानी के प्रेशर से लाइन में कई जगह सीवरेज पानी की मिक्सिंग हो रही है। इसको लेकर कई कॉलोनियों के लोग पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों को भी शिकायतें कर चुके हैं। पहले दादरी गेट क्षेत्र की कॉलोनियों में ज्यादा समस्या थी तो अब जीतूवाला जोहड़ फाटक पार की कॉलोनियों में संकट बना है। पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारी भी इनके समाधान के लिए कर्मचारियों की टीमें बनाकर विभिन्न हिस्सों में लाइन की खुदाई करा उसका कारण ढूंढने में जुटे हैं। शहर के जीतूवाला जोहड़ फाटक पार दिनोद रोड की कई कॉलोनियों में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। वहीं शहर के महम चौक पर भी मुख्य लाइन में सीवरेज का दूषित पानी लोगों के घरों तक सप्लाई हो रहा है।
ये बोले लोग
जीतूवाला क्षेत्र में पिछले काफी अर्से से दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। इस समस्या को लेकर काफी बार अधिकारियों से भी मिल चुके हैं। अधिकारी मौका मुआयना करते हैं और फिर समाधान का आश्वासन देकर चले जाते हैं, जबकि उनके घरों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। इससे उनके परिवार की सेहत भी बिगड़ रही है।
-राजेंद्र सिंह क्षेत्रवासी।
जीतूवाला जोहड़ दिनोद रोड पर कई कॉलोनियों का क्षेत्र आता है। इन सभी में पेयजल किल्लत और दूषित पानी आपूर्ति की समस्या बनी हैं। महिलाएं पीने का पानी लाने के लिए भी दूर दराज तक जाती हैं, जबकि नलों से बीमारी टपक रही है, जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। उनकी सेहत की किसी को कोई परवाह नहीं है।
-जयवीर, क्षेत्रवासी।
घरों के अंदर जो पानी आता है, उसे पीना तो दूर हाथ धोने भर से बदबू नहीं जाती। कई बार तो बोतल में पानी लेकर पब्लिक हेल्थ अधिकारियों को भी उनके कार्यालय में जाकर दिखाया और उसे पीने का अनुरोध कर चुके हैं, जबकि यही पानी रोजाना उनके घर तक आ रहा है। कई दिनों में पानी की सप्लाई आती है। जिसका कोई समाधान नहीं हो रहा है।
-जशवंती, क्षेत्रवासी।
जीतूवाला क्षेत्र मुख्य शहर से सुविधाओं के मामलों में कट चुका है। इसमें पेयजल सबसे गंभीर समस्या है। पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। जबकि समाधान ढूंढने के लिए भी जगह जगह खुदाई गई है। इन गहरे गड्ढों में बच्चों के गिरने का भय भी बना हुआ है। मगर कर्मचारियों को अभी तक हल नहीं मिला है। दो से तीन दिन में पानी की सप्लाई आ रही है, जो पानी आता है वह भी दूषित है।
-कर्ण सिंह नंबरदार, क्षेत्रवासी।
पिछले छह महीने से घरों के अंदर दूषित पानी आ रहा है। पीने का पानी भी बाहर से लाना पड़ता है। प्राइवेट टैंकर गिराते हैं तो उस पर भी भारी खर्च आता है। मगर दूषित पानी का कोई समाधान नहीं हो रहा है। कर्मचारियों ने भी लीकेज ढूंढने का काफी प्रयास किया है, मगर अभी तक वजह स्पष्ट नहीं है। उन्हें कब तक गंदा पानी पीना पड़ेगा, यह सवाल भी कई बार अधिकारियों से कर चुके हैं, मगर हर कोई चुप है।
- भागवती क्षेत्रवासी महिला।
पुराने शहर में पेयजल लाइन लीकेज और अनियमित आपूर्ति की समस्या का समाधान कराने के लिए संभावित इलाकों में 15 कर्मचारियों की टीमें लगाई गई हैं। महम रोड पर भी पिछले एक सप्ताह से लीकेज ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है, मगर अभी तक लीकेज की वजह नहीं मिली है। उनका प्रयास है कि पूरे शहर को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति मुहैया कराई जाए, इसके लिए विभागीय कर्मचारी संभावित इलाकों में लाइनों की खुदाई कर उनका कारण ढूंढ समाधान कराने में जुटे हैं।
-जयभगवान चोपड़ा, एसडीओ, शहरी पेयजल शाखा, जनस्वास्थ्य विभाग