पांच गांवों का 7.50 करोड़ का पेयजल प्रोजेक्ट करीब सात माह तक फाइलों में धूल फांकने के बाद अब किनारे कर दिया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत 12 किलोमीटर लंबी लोहे की लाइन भी बिछाई जानी थी। इन गांवों के लोग इस समय 400 रुपये में पानी का टैंकर लेकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। रा-वाटर का यह प्रोजेक्ट नहरी पानी की किल्लत के चलते यह प्रपोजल सिरे नहीं चढ़ सका है। गांव कोहलावास व लांबा में तो इस समय जलस्तर 700 फीट नीचे तक है। आने वाले गर्मी के मौसम में इन गांवों में पेयजल संकट और गहराने के आसार हैं।
गांव मिसरी, लांबा, कोहलावास, सौंप व कासनी गांवों के लिए पेयजल व्यवस्था को लेकर जनस्वास्थ्य विभाग ने सात करोड़ 50 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया था। करीब सात माह तक यह एस्टीमेट फाइलों में ही उलझता रहा। ऐसे में इन गांवों में पानी को लेकर लगातार संकट गहराता जा रहा है। कोहलावास व लांबा के ग्रामीण तो रोहतक रोड पर लगे हैंडपंप के जरिए जैसे-तैसे अपनी प्यास बुझा रहे हैं। घरेलू प्रयोग के लिए लोगों को 400 रुपये तक पानी का टैंकर खरीदना पड़ रहा है तथा यहां की महिलाएं दूर-दराज के खेतों से पानी लाने को मजबूर हैं।
गांव कोहलावास निवासी मास्टर सुरेंद्र सिंह, अशोक, नरेश कुमार ने बताया कि लोग सुबह चार बजे रोहतक रोड पर लगे हैंडपंप पर लाइन में लगते हैं। इसी प्रकार देर रात तक यह सिलसिला जारी रहता है। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोग ट्रैक्टर, साइकिल व बाइक आदि के जरिए पानी लाने को मजबूर हैं।
भूमिगत जल पूरी तरह लवणीय
ग्रामीणों ने बताया कि गांव कोहलावास व लांबा का भूमिगत जल 700 फीट नीचे तक है। जलस्तर इतना नीचे होने की वजह से ग्रामीणों के लिए बोरिंग व बिजली ट्यूबवेल की सुविधा भी आसान नहीं है। इतना ही नहीं गांव का भूमिगत जल पूरी तरह से लवणीय है। ऐसे में ग्रामीणों पेयजल को लेकर लंबे समय से परेशान चले आ रहे हैं।
यह था प्रोजेक्ट का हिस्सा
इस प्रोजेक्ट के तहत नहरी पानी उपलब्ध करवाए जाने को लेकर 12 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जानी थी जिसके जरिए जलघरों तक नहरी पानी उपलब्ध करवाया जाना था। नहर पर 60 बीएचपी पावर की मोटर लगाने की प्लानिंग थी। यह मोटर प्रति मिनट 42 सौ लीटर पानी का उठाती है। नहर पर जनरेटर लगाए जाने का भी प्रावधान था। विभाग ने यह प्लानिंग इस तरीके से तैयार की थी ताकि अगले 30 वर्षो तक इन पांचों गांवों में पानी की संकट न बढ़ने पाए।
नहीं मिली नहरी पानी की अनुमति
रा-वाटर का यह प्रोजेक्ट नहरी पानी नहीं मिलने की वजह से अब पूरी तरह से खटाई मेें पड़ गया है। इसके तहत नहर से इन गांवों के जलघरों तक के लिए लाइन बिछाई जानी थी लेकिन नहरी पानी की कमी बताकर इस प्रोजेक्ट को अब किनारे कर दिया गया है।
ग्रामीण पेयजल को लेकर चिंतित
गांव में इस समय भारी पेयजल संकट बना हुआ है। लोगों को पानी के टैंकर खरीदने पड़ रहे हैं। रोहतक पर लगे हैंडपंप के जरिए पानी की आपूर्ति हो रही है। अब आने वाले गर्मी के मौसम में पेयजल संकट और गहराएगा। इसे लेकर मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
नरेश कुमार, गांव कोहलावस
गांव में पेयजल संकट से लोग परेशान हो चुके हैं पता नहीं कब इस समस्या का समाधान होगा। हैंडपंप पर पानी के लिए सुबह चार बजे पहुंचना पड़ता है। गांव से काफी दूर एक कुएं के पानी से गुजारा हो रहा है।
-वेदपाल, गांव लांबा
मेरे गांव में पानी का संकट लंबे समय से चला आ रहा है। लोग 400 रुपये में पानी का टैंकर डलवा रहे हैं। अब गर्मी में पानी की खपत और बढ़ेगी जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ेगा। प्रशासन व विभाग को चाहिए कि पेयजल की समस्या का स्थाई समाधान करवाए।
अशोक कुमार, गांव लांबा
गांव में जमीन के अंदर का पानी खारा है, वह भी सैंकड़ों फीट नीचे तक उपलब्ध हो पाता है। महिलाओं को सिर पर मटके रख दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। लोग साइकिल, ट्रैक्टर, बाइक आदि के जरिए पानी लाने को विवश हैं ऐसे में लोगों काफी शारीरिक व मानसिक परेशानी हो रही है।
रामकृष्ण, गांव कोहलावास
एस्टीमेट तो बहुत तैयार होते हैं लेकिन मंजूरी मिले तब प्रोजेक्ट सिरे चढ़ते हैं। नहरी पानी की अनुमति न मिलने की वजह से यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ सका।
जगबीर मलिक, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग, चरखी दादरी